(शाश्वत तिवारी)
कुछ किस्मत वाले लोग वक्त रहते अस्पताल पहुंच गए और उनकी जान बच गई। कुछ तो ऐसे थे जो भीड़ में पैरों तले कुचल दिए गए और उन्होंने वहीं दम तोड़ दिया। आरसीबी की विक्ट्री परेड के दौरान अचानक से स्टेडियम के बाहर भीड़ बेकाबू होती गई और धीरे-धीरे भगदड़ के हालात पैदा हो गए। जल्द ही वहां चीख-पुकार मच गई और लोग नीचे गिरते चले गए।
3 साल की दिव्यांशी, 19 साल की साहना, 20 साल का भौमिक और 21 साल के श्रवण, ये वो नाम हैं जो अब इस दुनिया में नहीं रहे। बेंगलुरु में बुधवार को हुई जानलेवा भगदड़ में 11 लोगों की जान चली गई और 30 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। ये भगदड़ किसी धार्मिक आयोजन या फिर किसी राजनीतिक रैली में नहीं, बल्कि IPL की टीम रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की जीत का जश्न मनाने के दौरान हुई है। मरने वालों में 13 साल के किशोर से लेकर 33 की उम्र के लोग शामिल थे।
आरसीबी ने 18 साल के लंबे इंतजार के बाद आईपीएल की ट्राफी जीती, बेशक टी-20 क्रिकेट की सबसे बड़ी लीग में ये मुकाम आसान नहीं है, और खिलाड़ियों को जश्न मनाने का पूरा हक है। लेकिन जब इस जश्न में क्रेडिट लेने के मकसद से राज्य सरकार की भूमिका आ जाती है तो लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदार भी प्रशासन की बनती है। आरसीबी की विक्ट्री परेड में शामिल होने के लिए बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में 3 लाख से ज्यादा लोग पहुंच गए, जबकि क्षमता सिर्फ 35 हजार की थी। जाहिर तौर पर प्रशासन के इंतजाम नाकाफी साबित हुए, जिसकी कीमत 11 परिवारों के लोगों को अपनों की जान देकर चुकानी पड़ी।
कुछ किस्मत वाले लोग वक्त रहते अस्पताल पहुंच गए और उनकी जान बच गई। कुछ तो ऐसे थे जो भीड़ में पैरों तले कुचल दिए गए और उन्होंने वहीं दम तोड़ दिया। आरसीबी की विक्ट्री परेड के दौरान अचानक से स्टेडियम के बाहर भीड़ बेकाबू होती गई और धीरे-धीरे भगदड़ के हालात पैदा हो गए। जल्द ही वहां चीख-पुकार मच गई और इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, लोग गिर पड़े और बेहोश हो गए, जिन्हें तुरंत पास के अस्पतालों में ले जाया गया। हालांकि 11 लोगों की जान फिर भी नहीं बचाई जा सकी।
अपने इंजीनियरिंग स्टूडेंट बेटे को खोने वाले गमगीन शख्स ने प्रशासन को दोषी ठहराते हुए कहा, आपकी लापरवाही के कारण आज आपने मेरे बेटे की जान ले ली। मुझे आज मेरे बेटे का शव अपने साथ ले जाने की इजाजत दीजिए। मैंने अपना इकलौता बेटा खोया है, जो 22 साल का था। आपके रवैये के कारण ही मेरा बेटा आज सड़कों पर लाश बन गया है, वह मुझे बिना बताए यहां आ गया था।
हैरान करने वाली बात यह है कि स्टेडियम के बाहर मची भगदड़ के दौरान भी अंदर खिलाड़ी और राज्य सरकार के मंत्री जश्न मनाते रहे। हालांकि कार्यक्रम को छोटा जरूर किया गया था, लेकिन हादसे की जानकारी मिलने के बाद भी जश्न जारी रहा। स्टेडियम में समारोह के बाद आरसीबी टीम के खिलाड़ी लौट गए और नेता भी अस्पताल में घायलों से मुलाकात करने अपने घरों को चले गए। लेकिन स्टेडियम के बाहर सड़कों पर पड़े जूते-चप्पल हादसे की भयावह कहानी बयां कर रहे थे, क्योंकि हर कोई जा चुका था, लेकिन सिर्फ यही जूते-चप्पल बचे थे।
(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं)
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