जगदीश श्रीवास्तव, विशेष संवाददाता
राठ हमीरपुर। जनपद की सबसे प्राचीन और पौराणिक के साथ व्यापारिक नगर राठ। जो कभी कृषि जनित साधनो से संपन्न और अन्न उत्पादन के लिए जाना जाता था। जहां गन्ना और श्रीअन्न के साथ दूध और घी की भरमार थी। तहसील क्षेत्र के अतिरिक्त जहां दूर दराज के लोग भी व्यापार के लिए आते थे। मध्य प्रदेश का प्रवेश द्वारा कहा जाता था। नगर चूंकि स्वामी ब्रहमानंद के कारण शिक्षा का केंद्र बन गया था इसलिए देहात इलाको के लोग यहां शिक्षा के लिए आकर बसे। व्यापार के लिए बसे। सुरक्षा के लिए बसे। धीरे धीरे बसते बसते राठ नगर अब कस्बाई सुविधाआंे के अभाव में तकलीफदेह बस्ती के रूप में परिवर्तित हो चुका है। रही सही कसर नगर पालिका ने इसे नरक बनाकर पूरी कर दी है। अब हालत यह है कि कस्बा में बुनियादी सुविधाएं जैसे रास्ता, पानी, बिजली और सुरक्षा हासिल हैं ही नहीं। टैक्स की वसूली धड़ाधड़ हो रही है। पूरा नगर जुआरियों, अपराधियों, गुंडों और दबंगों से त्रस्त है। नगर में नागरिक मूलभूत सुविधाओं के अभाव से त्रस्त हैं। प्रचंड गर्मी के बीच पेयजल संकट, लगातार बिजली कटौती और भीषण जाम की समस्या ने आमजन का जीना मुश्किल कर दिया है। नागरिकों का आरोप है कि संबंधित विभागों के अधिकारी अपने कर्तव्यों से मुंह मोड़कर अवैध लकड़ी, मोरंग और मिट्टी के व्यापार में लिप्त लोगों को संरक्षण दे रहे हैं। लगभग दो लाख की आबादी वाले राठ नगर में जल संस्थान पेयजल आपूर्ति की जिम्मेदारी निभाने में पूरी तरह विफल नजर आ रहा है। नगर में मात्र एक जल टंकी से कुछ क्षेत्रों में जल आपूर्ति होती है, जबकि शेष इलाकों में सीधे ट्यूबवेल के माध्यम से जल भेजा जा रहा है। नए बसावट वाले बाहरी इलाकों में स्थिति और भी दयनीय है। जल निगम द्वारा लगाए गए हैंडपंप या तो खराब हैं या शोपीस बनकर रह गए हैं। हालांकि, नगर पालिका परिषद कभी-कभी टैंकरों के माध्यम से जल आपूर्ति कर रही है, लेकिन वह भी पर्याप्त नहीं है।
विद्युत विभाग की लापरवाही से नगरवासी बुरी तरह प्रभावित हैं। अघोषित कटौती के अलावा आए दिन केबल फाल्ट की समस्या ने लोगों को परेशान कर रखा है। विभागीय कर्मियों, विशेष रूप से सहायक अभियंता से संपर्क कर पाना भी आम लोगों के लिए मुश्किल हो गया है। अधिकांश समय उनके मोबाइल बंद रहते हैं और वैसे भी वे फोन उठाने से परहेज करते हैं।नगर की सड़कों पर अतिक्रमण के चलते जाम एक स्थायी समस्या बन गया है। सड़क किनारे की पटरी ही नहीं, मुख्य मार्गों पर भी दुकानदारों और वाहनों का कब्जा बना हुआ है। जब कभी जिलाधिकारी की बैठक होती है, तब दिखावे के तौर पर 200-400 मीटर क्षेत्र से अतिक्रमण हटाया जाता है, लेकिन वह भी अगले ही दिन फिर से पहले जैसा हो जाता है।
अंबेडकर चौराहा, बजरिया चौराहा, शिवद्वार, रामलीला मैदान, पंडित परमानंद चौराहा और उरई बस स्टैंड जैसे प्रमुख स्थानों पर दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है। कोतवाली और तहसील के अधिकारियों तक को अब बाईपास मार्ग से आवाजाही करनी पड़ रही है। मुगलपुरा निवासी रविंद्र अग्रवाल कहते हैं कि जाम की समस्या अब इतनी विकराल हो गई है कि बाहर से आने वाले मेहमान भी राठ आने से कतराने लगे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अधिकारी सिर्फ अवैध खनन और लकड़ी के व्यापार को बढ़ावा देने में लगे हैं, जबकि आमजन की समस्याओं पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा।जनता की मांग है कि नगर की मूलभूत समस्याओं को प्राथमिकता दी जाए और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। अन्यथा जनता को आंदोलन की राह पकड़ने पर विवश होना पड़ेगा।


बहुत सही एकदम रात की ज्वलंत समस्याओं का मूल्यांकन ।