जगदीश श्रीवास्तव
राठ हमीरपुरउत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उनकी पार्टी इंडी गठबंधन के तहत चुनाव लड़ेगी। हालांकि, इस घोषणा को राजनीतिक विश्लेषक जल्दबाजी भरा कदम मान रहे हैं, जिससे सहयोगी दलों विशेषकर कांग्रेस को सीट बंटवारे में अप्रत्याशित बढ़त मिल सकती है।
राठ विधानसभा क्षेत्र पर इसका खासा असर देखा जा रहा है। अब तक सपा टिकट के प्रबल दावेदार केवल पार्टी के भीतर संघर्ष कर रहे थे, लेकिन गठबंधन की घोषणा के बाद उन्हें यह आशंका सता रही है कि यह सीट कांग्रेस के खाते में जा सकती है। इस आशंका के पीछे मजबूत तर्क भी हैं — 2013 में कांग्रेस के गयादीन अनुरागी ने राठ सीट से जीत दर्ज की थी और वह कांग्रेस नेतृत्व के करीबी माने जाते हैं।
गयादीन अनुरागी का सपा से भी अतीत में नजदीकी रिश्ता रहा है। लंबे समय तक लखनऊ-दिल्ली में सक्रिय रहकर उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के बीच अपनी पकड़ बनाई है। गठबंधन की रणनीति के तहत यदि राठ सीट कांग्रेस को दी जाती है, तो गयादीन अनुरागी एक बार फिर विधान सभा चुनाव में सामने आ सकते हैं।
बुंदेलखंड क्षेत्र की 19 विधानसभा सीटों पर कांग्रेस सम्मानजनक हिस्सेदारी की मांग कर सकती है। यह स्थिति सपा के स्थानीय दावेदारों के लिए चिंता का विषय बन गई है। पहले जहां वे केवल समाजवादी पार्टी की आंतरिक राजनीति से जूझ रहे थे, अब उन्हें गठबंधन राजनीति के नए समीकरणों का भी सामना करना पड़ रहा है।
हमीरपुर लोकसभा क्षेत्र की सपा इकाई पहले से ही गुटबाजी का शिकार रही है, जिससे संगठनात्मक रूप से पार्टी कमजोर दिखाई दे रही है। ऐसे में गठबंधन की राजनीति से राठ सीट पर सपा की संभावनाएं और अधिक उलझती नजर आ रही हैं।
जहां कांग्रेस के गयादीन अनुरागी के लिए परिस्थितियां अनुकूल होती दिख रही हैं, वहीं सपा के संभावित उम्मीदवारों में संशय और निराशा का माहौल है। अब देखना यह होगा कि सीट बंटवारे में किसे वरीयता मिलती है और राठ की सियासी तस्वीर किस ओर रुख करती है।


Ati sunder