भारत-कोरिया साझेदारी को नई धार, सेमीकंडक्टर और एआई में बढ़ेगा सहयोग

भारत-कोरिया साझेदारी को नई धार, सेमीकंडक्टर और एआई में बढ़ेगा सहयोग

रिपोर्ट. शाश्वत तिवारी
सियोल। मंगोलिया के सफल दौरे के बाद अपने दो देशों की यात्रा के दूसरे चरण में, विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने दक्षिण कोरिया की अपनी दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा संपन्न की। वैश्विक स्तर पर तेजी से बदलते घटनाक्रमों और भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच इस उच्च स्तरीय दौरे को भारत-दक्षिण कोरिया विशेष रणनीतिक साझेदारी को एक नए स्तर पर ले जाने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजधानी सियोल पहुंचने के तुरंत बाद विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर ने दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून के साथ व्यापक प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता की। दोनों नेताओं के बीच करीब तीन घंटे तक चली यह बातचीत अप्रैल 2026 में दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे-म्युंग की भारत यात्रा के दौरान बनी सहमतियों और फैसलों के त्वरित क्रियान्वयन पर केंद्रित थी। बैठक में दोनों पक्षों ने व्यापार, निवेश, वित्त, जहाज निर्माण (पोत निर्माण), रक्षा, उन्नत कूटनीति, प्रौद्योगिकी और स्वच्छ ऊर्जा जैसे पारंपरिक और रणनीतिक क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग की गहन समीक्षा की। इसके अलावा, स्टार्टअप्स, फिनटेक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), सेमीकंडक्टर और महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) के उभरते क्षेत्रों में मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई गई। भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक बयान में बताया कि अपनी इस यात्रा के दूसरे दिन डॉ. जयशंकर ने जेजू द्वीप पर आयोजित 21वें जेजू शांति एवं समृद्धि मंच में मुख्य वक्ता के रूप में भाग लिया। “खंडित दुनिया में सहयोग का पुनर्निवेश” थीम पर आधारित इस वैश्विक मंच को संबोधित करते हुए उन्होंने दोनों देशों के बीच मजबूत पूरकताओं को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि जहाज निर्माण, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य और रक्षा कूटनीति जैसे क्षेत्रों में अपार संभावनाएं मौजूद हैं। साथ ही उन्होंने ‘ग्लोबल साउथ’ को अधिक क्षमताएं और अवसर प्रदान करने की वकालत की, ताकि वैश्विक विकास को नई गति मिल सके। वहीं दूसरी ओर दक्षिण कोरियाई विदेश मंत्री ने भारत में आयोजित हो रहे ‘कोरिया वीक’ के लिए नई दिल्ली का आभार व्यक्त किया, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कोरियाई व्यवसायों की समस्याओं को दूर करने की प्रतिबद्धता का हिस्सा है। दक्षिण कोरिया भी जल्द ही वहां काम कर रही भारतीय कंपनियों के लिए इसी तरह के संवाद का आयोजन करेगा। विशेषज्ञों के अनुसार यह यात्रा न केवल भारत और दक्षिण कोरिया के द्विपक्षीय रिश्तों को समकालीन और भविष्योन्मुखी बनाएगी, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ को और अधिक मजबूती प्रदान करेगी।

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