स्पेशल रिपोर्ट

सीबाईआई जांच कराने वाले वकील विजय द्विवेदी का दावा
अन्य कई अभियुक्त अब भाजपा की शरण में पनप रहे हैं बनेगे गवाह
पीयूष त्रिपाठी
लखनऊ। कहते है कि प्रेम और जंग में सब कुछ जायज़ होता है लेकिन राजनीति की जंग में भी साम दाम दंड भेद सब कुछ जायज़ होता है। 2027 यूपी विधानसभा चुनाव नज़दीक आ रहे हैं युद्धभूमि में सेनाएं मोर्चे पर तैनात होने लगी हैं ऐसे में क्या भाजपा के प्रबल प्रतिद्वंदी सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के खिलाफ खनन घोटाले का जिन्न सीबीआई कोर्ट की बोतल से बाहर आ सकता है? सियासत की सरज़मी पर यह आशंकाएं जोर पकड़ने लगी हैं क्योंकि बुंदेलखंड के हमीरपुर में मौरंग खनन के खिलाफ हुई सीबीआई की जांच के बाद दाखिल चार्जशीट में 11 अन्य अभियुक्तों के साथ 2013 में किये गये 18 मौरंग भूखंड पट्टो को भी अवैध माना गया है जिसमें रोल ऑफ मिनिस्ट्री के खिलाफ चार्जशीटेड किया गया है और उस वक्त मुख्यमंत्री रहे अखिलेश यादव के ही अंडर में भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग हुआ करता था। समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव द्वारा 2027 में भाजपा के सामने कठिन चुनावी मुकाबला होने की संभावना है लिहाज़ा क्या खनन घोटाले के जरिए अखिलेश यादव को कटघरे में ले जाने का प्रयास भाजपा करेगी? खनन घोटाले की जांच की याचिका दाखिल करने वाले वकील विजय द्विवेदी ने यह आशंका व्यक्त करते हुए पेज 3 न्यूज से दावा किया है कि शेष जो 11 अन्य सीबीआई की जांच में अभियुक्त बनाये गये हैं उनमें से अधिकतर तो भाजपा में ही शामिल हो चुके हैं उन्हें बचाने के लिए और तत्कालीन खनिज विभाग के मंत्री रहे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के खिलाफ इन अभियुक्तों को गवाह बनाकर अखिलेश को घेरा जा सकता है।
गौरतलब है कि हमीरपुर निवासी विजय द्विवेदी ने मौरंग खनन में अनियमितताओं अवैध खनन आदि को लेकर वर्ष 2016 में हाईकोर्ट में एक पीआईएल दाखिल की थी। हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद अपनी निगरानी में सीबीआई जांच शुरू करा दी थी। सीबीआई ने पीई दर्ज कर जांच शुरू की फिर 2024 में चार्जशीट लगाई। विजय द्विवेदी के मुताबिक इस चार्जशीट में सपा से एमएलसी रहे रमेश मिश्र, दिनेश मिश्र, सत्यदेव दीक्षित व जिला पंचायत अध्यक्ष रहे संजय दीक्षित, करन सिंह, रामऔतार राजपूत तत्कालीन डीएम हमीरपुर रही आईएएस बी. चंद्रकला समेत 11 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की थी। जांच के दायरे में खुद को फंसते देख एक-एक कर के कई नेता भाजपा में शामिल हो गये थे यूपी में तब से लगातार भाजपा की सरकार है और सरकार के संरक्षण में कई खनन घोटाले के अभियुक्त भाजपाई बन कर सरसब्ज़ हैं। विजय द्विवेदी ने बताया कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव डायरेक्ट तो कहीं फंसे नहीं हैं लेकिन उनके तत्कालीन खनिज मंत्रालय की भूमिका को सीबीआई ने चार्जशीटेड किया है। ज़ाहिर बात है कि अखिलेश यादव इनडायरेक्ट मुल्ज़िम की तरह हैं और बाकी जो अभियुक्त भाजपा की छाव में फल फूल रहे हैं उन्हें इस घोटाले में गवाह के तौर पर इस्तेमाल किये जाने की पूरी आशंका बनी हुई है। विजय द्विवेदी ने यह भी बताया कि इसी मामले में ईडी ने भी एक एफआईआर दर्ज की है जिसमें यही सभी लोग मुल्ज़िम हैं। विजय द्विवेदी के अनुसार यूपी में ज्यों-ज्यों चुनाव नज़दीक आ रहे हैं त्यों-त्यों इस बात की आशंका जोर पकड़ रही है कि अखिलेश यादव की छवि बिगाड़ने और उन्हें खनन घोटाले में शामिल दिखा कर दबाने का राजनैतिक प्रयास किया जायेगा। सीबीआई कोर्ट ने अभी तक इस मसले पर सुनवाई का संज्ञान नहीं लिया है न ही ईडी ने कोई कार्रवाई की है। उन्होंने कहा कि भाजपा अगर ऐसा ऐन वक्त पर करती है तो फिर अखिलेश यादव के साथ खनन विभाग के उच्चाधिकारी जो कि चार्जशीट में शामिल है के लिए मुश्किल खड़ी हो सकती है। विजय द्विवेदी ने यह भी कहा कि बड़े आश्चर्य की बात है कि 10 साल होने जा रहे हैं न तो किसी अभियुक्त के खिलाफ कोई कार्रवाई हुई है न ही चार्जशीट के बावजूद सीबीआई कोर्ट मुकदमे की नियमित सुनवाई शुरू कर पाई है। इतना ही नहीं, अवैध खनन होने के दौरान हमीरपुर में डीएम रहें तीन आईएएस अफसरों बी चंद्रकला, संध्या तिवारी, भवनाथ से भी सीबीआई ने पूछताछ की थी। सीबीआई ने अपनी जांच के दौरान पाया कि न सिर्फ हमीरपुर बल्कि खनन घोटाला फतेहपुर, सहारनपुर, कौशांबी, शामली, देवरिया और सिद्धार्थनगर में भी हुआ था। ऐसे में इन जिलों में भी तैनात रहे जिलाधिकारियों के ठिकानों में सीबीआई ने छापेमारी की थी, जिसमें एजंसी को करोड़ों रुपए बरामद हुए थे। वहीं सीबीआई के अलावा प्रवर्तन निदेशालय भी इस मामले में अपनी जांच कर रही है और पूर्व खनन मंत्री व घोटाले के आरोपी गायत्री प्रसाद प्रजापति की करोड़ों की संपत्ति जब्त कर चुकी है। सीबीआई ने 5 जनवरी 2019 को 2012 और 2016 के बीच हमीरपुर में अवैध खनन से जुड़े मामले के सिलसिले में दिल्ली और यूपी में 14 स्थानों की तलाशी ली थी। जिन स्थानों की तलाशी ली गई उनमें तत्कालीन एसपी एमएलसी रमेश कुमार मिश्रा और बीएसपी नेता संजय दीक्षित के आवास भी शामिल थे। छापेमारी उस दिन की गई थी जब एसपी और बीएसपी ने 2019 चुनावों के लिए सीट बंटवारे को अंतिम रूप दिया और औपचारिक रूप से आरएलडी के साथ अपने गठबंधन की घोषणा की थी।
