
राठ — राठ कस्बे में दो दिन की लगातार बारिश ने नगर पालिका परिषद की जल निकासी व्यवस्था की सारी हकीकत उजागर कर दी है। एक तरफ संचारी रोग रोकथाम के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, वहीं जगह-जगह भरे गंदे पानी ने इस अभियान पर पानी फेर दिया है।
बीते दो दिनों में दोपहर बाद हुई तेज बारिश से कस्बे के अधिकांश मोहल्लों में नालियां उफन पड़ीं और पानी घरों में घुस गया। हालत यह रही कि स्थानीय सिविल जज का आवास भी इसकी चपेट में आ गया। कोट बाजार जैसी ऊँचाई पर बसी जगहें तो बच गईं, लेकिन बाकी इलाकों में लोगों को रातभर बाल्टी और मग्गे से पानी निकालना पड़ा।
सबसे बुरा हाल सरकारी अस्पताल के आसपास का है। राजस्व कर्मचारियों के आवासों में पानी घुसने से बचाने के लिए नाला बंद करवा दिया गया, जिससे अस्पताल-बजरिया मार्ग तालाब बन गया। इस वजह से मरीजों और राहगीरों को कमर तक भरे गंदे पानी से गुजरना पड़ा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पालिका परिषद के गठन के इतने सालों बाद भी आज तक जल निकासी की ठोस योजना नहीं बनी है। नालियों की सफाई नाममात्र की होती है और बजट सिर्फ फाइलों में खर्च होता दिखता है। गंदा पानी जमा होने से डेंगू, मलेरिया जैसी बीमारियों के फैलने का खतरा और बढ़ गया है।
लोगों ने प्रशासन से तत्काल राहत कार्य चलाने, नालियों की नियमित सफाई और बरसाती पानी के स्थायी निस्तारण की योजना लागू करने की मांग की है। वरना संचारी रोग नियंत्रण सिर्फ पोस्टर-बैनर और झाड़ू फोटो सत्र तक ही सीमित रह जाएगा।
