राठ——-श्री मेला जल विहार समिति के तत्वावधान में चल रही श्रीराम कथा के तीसरे दिन वृंदावन धाम से पधारे कथा वाचक धन्वंतरि जी महाराज ने भगवान शिव विवाह प्रसंग का अद्भुत वर्णन किया।
उन्होंने शिव जी के श्रृंगार का आध्यात्मिक रहस्य बताते हुए कहा कि शिव ने मुकुट के स्थान पर जटाओं का मुकुट धारण किया, जो इस बात का प्रतीक है कि जीवन में गृहस्थ आश्रम में प्रवेश करने से पूर्व विचारों को संयमित करना आवश्यक है। शिव के भस्म धारण करने का महत्व बताते हुए उन्होंने कहा कि यह मृत्यु की स्मृति दिलाता है और जब मृत्यु का ध्यान होगा तभी ईश्वर का स्मरण संभव है।
कथा में बताया गया कि भगवान शिव की बारात में भूत-प्रेतों के साथ-साथ बड़े-बड़े संत, महात्मा, त्यागी और तपस्वी भी सम्मिलित हुए। विवाह उपरांत शिव ने माता पार्वती को राम कथा का श्रवण कराया। यह संदेश दिया गया कि प्रत्येक गृहस्थ को विवाह के बाद सत्संग और भगवान की कथा से जुड़ना चाहिए, तभी जीवन सफल होगा।
कथा श्रवण के दौरान समिति के पदाधिकारीगण सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।
