रियल मीडिया नेटवर्क
भरुआ सुमेरपुर। वर्णिता संस्था के तत्वावधान में सत्तावनी समर का एक आदि पुरोधा मंगल पाण्डेय की जयंती मनाई गई।
संस्था के अध्यक्ष डॉ.भवानीदीन ने श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि मंगल पाण्डेय सही अर्थों में स्वाधीनता संघर्ष की एक पहली क्रांति ज्वाला थे। इनका जन्म 19 जुलाई 1827 को बलिया जनपद के नगवा गांव में दिवाकर पांडेय व अभिरानी पांडेय के घर हुआ था। 1849 में वह 22 वर्ष की उम्र में अंग्रेजी फौज में भर्ती हुए थे।
सत्तावनी समर काल 1857 में संघर्षी-वेदी में अपनी पहली आत्माहुति दी थी। पांडेय के रणहुंकार के मूल में मात्र कारतूसों में गाय की चर्बी को ही एकमात्र कारण नहीं माना जा सकता है। अपितु मंगल को गुलामी की कसक सता रही थी और वह आजादी के लिए संघर्ष की भावना से भी प्रभावित थे। मंगल पाण्डेय ने दो-तीन गोरे अधिकारियों को मार कर मातृभूमि के लिए आत्मदान की भूमिका तैयार कर दी थी। इन्हें बैरकपुर में ही आठ अप्रैल 1857 को फांसी पर लटका दिया गया। वह 30 वर्ष की उम्र में ही शहीद हो गए। कार्यक्रम में अशोक अवस्थी, बाबूलाल,सिद्धा, प्रेम,सागर, रामनारायन, रिचा, महावीर, होरी लाल, विकास, जुगुल किशोर, दस्सी,राहुल प्रजापति आदि शामिल रहे।

