श्रीलंका में बौद्ध धर्म से जुड़ी प्रतिकृतियों की लगी प्रदर्शनी, भारतीय उच्चायुक्त ने किया उद्घाटन


शाश्वत तिवारी
नई दिल्ली/कोलंबो। श्रीलंका में भारत के उच्चायुक्त संतोष झा ने 21 जुलाई को आयोजित एक समारोह में वैशाली स्थित वास्काडुवा के राजगुरु श्रीसुबुथी महा विहाराय में सम्राट अशोक के धम्म स्तंभ की प्रतिकृति का उद्घाटन किया। इस अवसर पर भारतीय उच्चायुक्त ने मंदिर के मुख्य अधिष्ठाता, परम पूज्य डॉ. वास्काडुवावे महिंदावांसा महानायके थेरो के साथ मंदिर में पवित्र कपिलवस्तु अवशेषों की एक विशेष प्रदर्शनी का उद्घाटन भी किया।
कोलंबो स्थित भारतीय उच्चायोग ने एक बयान में कहा इस अवसर पर महानायके थेरो ने इस बात पर प्रकाश डाला कि यह श्रीलंका में उद्घाटन किया जाने वाला पहला अशोक स्तंभ प्रतिकृति है। उन्होंने बौद्ध शिक्षाओं के संरक्षण में सम्राट अशोक की महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में बताया और मंदिर में अवशेषों की ऐतिहासिक यात्रा का भी वर्णन किया। थेरो ने बौद्ध विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार के प्रयासों को भी सराहा।
अपने संबोधन में भारतीय उच्चायुक्त झा ने इस बात पर जोर दिया कि यह महत्वपूर्ण अवसर भारत और श्रीलंका के बीच गहरे ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक संबंधों की पुष्टि करता है। इस बात पर जोर देते हुए कि श्रीलंका आज बौद्ध शिक्षाओं एवं अध्ययन के प्रमुख केंद्रों में से एक है, उन्होंने कहा कि साझा बौद्ध विरासत दोनों देशों के लोगों को जोड़ने वाले सबसे मज़बूत बंधनों में से एक है।
भारतीय उच्चायुक्त ने इस विरासत को और मज़बूत करने के लिए श्रीलंका में भारत द्वारा की जा रही कुछ पहलों पर प्रकाश डाला, जिनमें लगभग 10,000 बौद्ध विहारों और पिरिवेनस को मुफ़्त सौर विद्युतीकरण प्रदान करने की एक परियोजना भी शामिल है।

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