टॉक शो- बीसीबाज


मुख्य पात्र महेश शर्मा और अक्षय कुमार सिंह
यह एक सटायरिकल टॉक शो है जो किसी भी प्रोफेशन, सिस्टम, लॉ एंड ऑर्डर आदि पर हास्य व्यंग्य शैली चलेगा। इसमें मुख्यतः दो ही पात्र होंगे जो गुदगुदाने वाली शैली में बातचीत करते हुए दिखेंगे। एक मेकप में दूसरा सामान्य कॉस्ट्यूम में। बीच में गोलमेज होगी। कॉलर माइक लगाया गया होगा। होस्ट और गेस्ट के बीच संवाद कुछ इस तरह होंगे। संवाद कुछ ऐसे होंगे।
होस्ट-मेरे प्यारे दर्शकों जै रामजी की। बीसीबाज के पहले एपिसोड आज मेरे खास मेहमान हैं रील बाबा उर्फ टिकटॉकिया। जैसा की आप जानते हैं कि ये कानपुर के नंबर वन के बीसीबाज हैं। इनका काम ही रील बनाना और सोशल माीडिया में डालना। जहां वीडियो लायक कुछ भी दिखा, चट्ट से रील बनायी पट्ट से डाल दिया। दे दनादन लाइक शेयर हासिल करने में जुट जाते हैं। मित्र मंडली के बीच उछल-उछलकर बताते हैं देखा, अमा बैलगाड़ी युग में जी रहे हो का। सोशल मीडिया में आओ। डाउन मार्केट कहीं के। तो दर्शकों हमारे बीसीबाज रीलबाबा उन इने-गिने लोगों में हैं जिन्हें कुछ नहीं आता। कुछ और न आता हो हम को पर रील बनाना आता है। शायद यही वजह है कि इन्हें लाखों लोग जानते हैं। सोशल मीडिया में इनकी प्रसिद्धि ने इन्हें इत्ता लोकप्रिय बना दिया है कि इनकी लोकप्रियता इनके फोन की बैटरी एक साथ खत्म होती होगी। (बैकग्राउंड में दर्शकों की तालियां)
होस्ट-नमस्कार..। (गेस्ट अनसुना कर देता है) नमस्कार।
गेस्ट-(चश्मा आंखों से हटाकर सिर पर किसी बॉलीवुड के हीरो की तरह हटाकर सिर पर रखते हुए) नमस्कार जी नमस्कार। यू आर वन ऑफ दि लकी पर्सन जिन्हें मैंने इंटरव्यू के लिए टाइम दिया है। आप को बता दूं कि मैं इंटरव्यू उन्हीं को देता हूं जिनकी अनुयायियों यानी फॉलोवर्स की संख्या कम से कम 50 हजार हो और ज्यादा से ज्यादा कोई सीमा नहीं है। आपको मुझसे मिलकर खुशी हुई कि नहीं। होस्ट-खूशी तो तब होगी जब शो हिट हो जाएगा। आपको देखकर लगता है कि लोग भाग न जाए।
गेस्ट-तहजीब है कि नहीं..। बुलाकर इंसल्ट कर रहे हो। क्या मेरा लुक स्मार्ट नहीं है? कनपुरिये हो न तभी तो। (फिर हंसी)
होस्ट- आप क्या करते हो?
गेस्ट-अबे स्साले तुम मेजबानी कर रहे हो या मजाक, वही दोहरा रहे हो। (होस्ट गुस्सा होने लगता है तो गेस्ट कहता है कि माफ करना थोड़ात इधर-उधर हो जाता हूं)। क्या मजा मिलता है बात दोहरा कर। जब हमने तुम्हारे स्टूडियो में धुंआधार एंट्री मारी थी तब पूरा स्टाफ मुझे ही देख रहा था। मैं टिकटॉकिया रील बाबा हूं, कोई मजाक न समझ लेना। लाखों लोग जानते हैं। तुम्हे पता भी है कि नहीं। गूगल की कृपा बरस रही है। कुछ दिन पहले कृपा अटक गयी थी। तो निर्मल बाबा की शरण में गया था। उनसे पूछा था। तो उन्होंने पूछा था दोन्ने में समोसे हरी चटनी के साथ कभी खायी है? मैने कहा, नहीं। निर्मल बाबा बोले, कृपा वहीं अटकी है। तब से हरी चटनी और समोसा खाने रोज घंटाघर पर जाता हूं। भाई क्या बताएं तीन दिन से हिट्ज लाइक शेयर आदि मिलना कम हो रहे थे। तो पता चला कि समोसे वाला धनियां महंगी होने के कारण पालक पीस-पीसकर चटनी खिला रहा है। एक दिन तो निखालिस पालक मुंह में आ गयी तो जीभ ने चुगली कर दी। मैने भी समोसे वाले को ऐसा हउंका कि वह फिर धनिया की चटनी बनाकर खिलाने लगा। अब थोड़ा सीरियस हो तो बताऊं कि मेरी दुकान कैसे चलती है।
होस्ट-लो हो गया (ठुड्डी पर हाथ रखकर वह बैठ जाता है जैसे बहुत सीरियस हो।)
गेस्ट-टेक इट सीरियसली। आई एम कंटेंट क्रियेटर। मतलब सुबह निन्ने मुंह उठकर सबसे पहले कैमरा ऑन कर देता हूं। और शुरू कर देता हूं बीसी। यानी जो मन में आए बोल देता हूं। तभी तो बीसी बाज लोक कह देते हैं। पर बुरा नहीं मानता।
होस्ट-क्या मतलब? मतलब यही हुआ न कि मुंह चलाओ और फॉलोअर्स बढ़ाओ।
गेस्ट-बिल्कुल। और अब तो कंपनियां मुझे पेड प्रमोशन देती हैं। कउनो अइसा-वइसा समझे हो का?
होस्ट-आप पढ़े कहां तक….?
गेस्ट-(वाक्य पूरा होने से पहले ही) शादीवादी करनी है क्या? बातचीत में पढ़ाई-लिखाई कहां आ जाती है। हाईस्कूल दिया था। फेल हो गए। बाप ने दौड़ा-दौड़ाकर सूता था। आगे-आगे मैं पीछे-पीछे बाप। जब भी वो मुझे पीटते थे तो न जाने कहां से बुढ़ऊ में स्टेमिना आ जाता था। मैंने भी सोचा पढ़कर काहे टाइम बरबाद करें तो छोड़ दी। सच पूछो तो भाई बरबादी लगती थी पढ़ाई। सोशल मीडिया प्लेटफार्म यूज करके न जाने कितने निठल्ले कमा रहे हैं। मुझ उन निठल्लों न गिन लेना।
होस्ट-तो अब टाइम किसका बर्बाद कर रहे हैं? (फिर हंसी)
गेस्ट-दरअसल आप जैसे खूसटों को मेरी बात समझ में न आएगी।
होस्ट-इसलिए क्योंकि मैं बातें समझता हूं। वीडियो नहीं चबाता। (फिर सामूहिक हंसी)। वैसे आपकी रीच कितनी होगी?
गेस्ट-यही क्या कम है कि आपकी रिक्वेस्ट पर आपके स्टूडियो आ गया हूं। इसी से अंदाजा लगा लीजिए। अरे मुझे रवीश कुमार, अजीत अजुम, आशुतोष, गुल्लू (न्यूज 18 वाला) आरे हां याद आया गुल्लू का नाम अमीष देवगन, चित्रा आदि स्टूडियो बुलाते हैं पर मैं नहीं जाता। खुद का शुक्र है कि तुम्हारे यहां आ गया हूं।
होस्ट- देख लिया। टिकटॉकिया रील बाबा को। ये उदाहरण हैं कि कुछ लोग कुछ न करके बहुत कुछ बन जाते हैं जैसे कि ये हमारे गेस्ट। और कुछ लोग सबकुछ करके गुमनामी जिंदगी जी रहे होते। जैसे आप। फिलहाल जैसे-तैसे दुकान चला रहा हूूं। अब देखो बीसीबाज के अगले एपिसोड में कौन फंसता।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *