भारत की विपक्षी पार्टियां देश में क्यों झूठ की बुनियाद पर अराजकता फैला रही हैं ?

यदि भारत सरकार का विपक्ष गैरत मंद होता तो बिहार में उसके द्वारा प्रायोजित मिंता देवी,रंजो देवी एवं सुबोध कुमार जैसे लोगों का सत्य सामने आ जाने के बाद और उसी की मुख्य कड़ी (CSDS) सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटीज के डायरेक्टर संजय कुमार द्वारा महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के गलत आंकड़े प्रस्तुत करने का स्पष्टीकरण देते हुए देश भर से क्षमा मांग कर सोशल मीडिया से अपना झूठा ट्यूट डिलीट कर देने के बाद उन गलत आंकड़ों की चोरी पकड़े जाने का दावा करने वाले राहुल गांधी देश से क्षमा मांग लेते ! लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया ! देश जानना चाहता है कि वोट चोरी की जो अफवाह फैलाने वाले लोग और गैंग हैं उनके सरगना इस विषय पर अपना क्या विचार रखना चाहते हैं ? या फिर भी वो लोग अभी भी अपना वही पुराना राग बार बार अलापते रहेंगे,और देश वासियों विशेषकर बिहार की जनता जनार्दन को अभी आगे भी गुमराह करते रहेंगे ?
कांग्रेस शासन काल 1963 में रजनी कोठारी द्वारा स्थापित (CSDS ) यह एक भारतीय शोध संस्थान है जो सामाजिक विज्ञान और मानविकी पर केंद्रित है,इसका अधिकांश वित्तपोषण भी भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद द्वारा किया जाता रहा है,लेकिन विगत कुछ वर्षों से इस संस्थान को विदेशी फंडिंग हो रही है ! इसे भी CSDS के डायरेक्टर संजय कुमार ने R भारत न्यूज चैनल के एक चर्चित पत्रकार अरनब गोस्वामी के सवालों का जबाव देते हुए स्वीकार किया कि उनके संगठन को विशेष परियोजनाओं (Special Projects) के लिए विदेशी फंड मिला है। अरनब गोस्वामी ने पूछा कि क्या उन्हें फोर्ड फाउंडेशन (Ford Foundation) से फंड मिला ? तो संजय कुमार ने स्वीकार किया कि कुछ समय पहले यह फंड हमें मिला था ! इसके बाद अरनब गोस्वामी ने पुनः पूछा कि क्या ब्रिटिश सरकार से भी फंड CSDS को मिला था ? तो संजय कुमार ने उन्हें गोलमोल जबाव देते हुए कहा कि,यह मुझे ठीक से याद नहीं है ! उन्होंने एक अन्य प्रश्न के उत्तर में यह भी बताया कि उन्हें कनाडा की डच एजेंसी IDRC, Canada, सहित अन्य International Research Foundation जैसी संस्थाओं से भी फंड मिला है,और यह सारे विदेशी फंड उन्हें भारत में विशेष प्रोजेक्ट पर काम करने के लिए ही प्राप्त हुए हैं !
स्वतंत्र भारत में सबसे अधिक समय तक कांग्रेस की जिसे आप एक परिवार (गांधी नेहरू) की सरकारें कह सकते हैं रहीं ! सन् 1990 से पूर्व के सभी मतदाता जानते हैं कि उस समय मतदान बैलेट पेपर पर मोहर लगाकर किया जाता था ! तब कितनी धांधली होती थी ? कितनी अराजकता होती थी ? कितने बूथों पर बाहुबली लोग कब्जा करके मतपेटियां भर दिया करते थे ? फिर आया EVM मशीन से मतदान का दौर पहली बार हुए EVM मशीन से चुनाव में कांग्रेस की सरकार बनीं ! किन्तु सन् 2014 लोकसभा चुनाव में EVM से हुए चुनाव में कांग्रेस हार गई भाजपा NDA गठबंधन बिजई हो गया बस यहीं से कांग्रेस को EVM में गड़बड़ी दिखाई देने लगी और फिर चुनाव दर चुनाव EVM मशीन से हुए चुनाव में भाजपा बिजई होती रही और कांग्रेस हर बार भाजपा पर EVM मशीन पर गड़बड़ी हैंग करने का झूठा आरोप लगाकर देश को गुमराह करती रही ! कांग्रेस के चिर युवा युवराज राहुल गांधी तो हर सभा मंच से EVM को दोषी ठहराते रहे परिणाम यह हुआ कि मामला पहले चुनाव आयोग गया जहां चुनाव आयोग ने EVM मशीन में कोई गड़बड़ी सिद्ध करने के लिए सभी विपक्षी पार्टियों को आमंत्रित किया लेकिन वहां कोई नहीं गया ! पुनः यह EVM मशीन में गड़बड़ी का यह मामला देश के उच्चतम न्यायालय तक जा पहुंचा लेकिन वहां कांग्रेस पार्टी या कोई विपक्षी पार्टी EVM में कोई गड़बडी सिद्ध नहीं कर सकीं ! उच्चतम न्यायालय से मुंह की खाकर कांग्रेस व विपक्षी पार्टियों से यह EVM का मुद्दा छिन गया ! तो कांग्रेस के चिर युवा युवराज राहुल गांधी के साथ संयुक्त विपक्षी पार्टियां (इंडी गठबंधन) एक नया झूठा मुद्दा ढूढ़ कर ले आये जिसकी मूल जड़ में CSDS के डायरेक्टर संजय कुमार थे जिन्होंने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के झूठे आंकड़े प्रस्तुत करके राहुल गांधी को मुद्दा दे दिया ! अब यह जांच का विषय है कि उन्होंने यह राष्ट्रद्रोही कार्य गलती से किया य फिर विदेशी फंडिंग के तहत एक टूल किट के रूप में किया ? क्योंकि 2014 के बाद से देश में कई बार भारत विरोधी एजेंसियों के सहारे भारत सरकार और मोदी जी को बदनाम करने के लिए षड़यंत्र किए जा चुके हैं ! चाहे भारत की बड़ी जीवन बीमा कम्पनी Lic को डूब जाने की बात कही गई हो य फिर भारतीय स्टेट बैंक ऑफ इंडिया SBI को डूबने की बात रही हो,य फिर हिडेन वर्ग रिपोर्ट की टूल किट पर भारत के उद्योगपति अडानी इंटरप्राइजेज के शेयर लुढ़का कर भारत की अर्थ व्यवस्था बिगाड़ने का मुद्दा रहा हो ! राफेल युद्धक विमान खरीद से जुड़ा झूठ फैलाकर भारत के कर्मठ प्रधानमंत्री को चोर (चौकीदार चोर है) कह कर भारत की गरिमा गिराने का मामला रहा हो जिसमें उच्चतम न्यायालय में राहुल गांधी को माफी भी मांगती पड़ी ! कई और अन्य मामलों में माफी मांग कर भी राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन में उनके सहयोगी झूठ पर झूठ बोलकर हर दिन देश की जनता को गुमराह करने का प्रयास करते हैं और उसी कड़ी में इन दिनों बिहार में चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्यक्रम को लेकर झूठ दर झूठ फैलाया जा रहा है और तो और अब राहुल गांधी सार्वजनिक मंचों से संवैधानिक संस्था चुनाव आयोग के अधिकारियों को धमकाने का भी काम कर रहे हैं ! देश के संविधान की उस पवित्र पुस्तक को जेब में डालकर हर सभा मंच पर उसे लहराने वाले संविधान बचाने की मनगढ़ंत कहानी गढ़ने वाले लोग,संवैधानिक पारित अध्यादेश की प्रति मंच पर फाड़कर फेंकने वाले राहुल गांधी अपने इंडिया गठबंधन के नेताओं के साथ प्रतिदिन न्यायपालिका चुनाव आयोग सीबीआई ईडी को जैसी स्वायत संस्थाओं को नकारकर भारत के संविधान की गरिमा को कलंकित कर रहे हैं, राजनीतिक हलकों में ऐसी सुगबुगाहट हो रही है कि अब राहुल गांधी और इंडी गठबंधन चुनाव आयुक्त पर महाभियोग चलाने की भी तैयारी कर रहे हैं,ये लोग कभी चीफ जस्टिस पर,कभी राष्ट्रपति पर एवं कभी उपराष्ट्रपति पर,और कभी चुनाव आयुक्त पर महाभियोग प्रस्ताव लाते हैं यह सब देखकर कहा जा सकता है कि – रस्सी जल गई, लेकिन ऐंठन नहीं गई ! समझने वाली बात यह है कि राहुल गांधी को विपक्ष में रहकर जब इतना घमंड है,तो सभी देशवासी कल्पना करें कि जब ये सरकार में रहे होंगे,तब इन्होंने क्या क्या कारनामें किए होंगे ? ये मात्र ग्यारह वर्ष सत्ता से दूर क्या हुए,निहंग नंगे हो गए हैं,कांग्रेस सत्ता के बिना जिंदा नहीं रह सकती यह बात वर्तमान में बखूबी देखी जा रही है जब लोकसभा सदन में अराजकता की जाती है,सड़क पर अराजकता की जाती है,सार्वजनिक मंचों एवं सभाओं से श्रीलंका बांगलादेश जैसी अराजकता फैलने की आशंका व्यक्त की जाती है ! इसे देख समझ कर इनके कुत्सित मनोभावों को समझा जा सकता है और अच्छी बात यह है कि देश की जनता इनकी नस नस से वाकिफ होती जा रही है ।
राहुल गांधी स्वयं सपरिवार भ्रष्टाचार सहित अन्य गम्भीर मामलों में न्यायालय द्वारा सजा और फिर उस सजा पर स्थगनादेश लेकर जमानत पर छूटे होने के बाद गठबंधन के उन साथियों के साथ जिन पर अपराध सिद्ध हो चुके हैं सजा सुनाई जा चुकी है के साथ मिलकर देश की सत्ता प्राप्त करने के लिए हर हथकंडे अपना रहे हैं ! भले ही देश के लोकतंत्र की कितनी भी क्षति हो जाये कितना ही देश का आर्थिक सामरिक नुकसान हो जाये लेकिन उन्हें किसी भी तरह सत्ता उन्हें मिल जाये बस ! इसी कामना सिद्धि में वो दिन रात अपने सहयोगियों के साथ लगे हैं, लेकिन देश का प्रत्येक प्रबुद्ध नागरिक और देश का हर प्रबुद्ध वर्ग का मतदाता अब जागरूक हो चुका है ! जो भविष्य में अब इनकी किसी टूल किट या किसी झूठ के बहकावे में आ कर इन्हें सत्ता देने वाला नहीं है ।
एक विचार प्रवाह
विद्यासागर त्रिपाठी
मूसानगर कानपुर देहात उप्र .

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