राठ—– श्री मेला जल विहार समिति राठ के तत्वावधान में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के पंचम दिवस पर कथा व्यास मानस माधुरी पाठक जी ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया।
कथा में पूतना वध, मुखदर्शन एवं गोवर्धन पूजा जैसे प्रसंगों ने श्रोताओं को भक्तिरस में सराबोर कर दिया। व्यास जी ने कहा कि सच्चा धनवान वही है, जो तन, मन और धन से सेवा व भक्ति करता है। उन्होंने बताया कि भगवान की प्राप्ति केवल सच्चे प्रेम और समर्पण से ही संभव है।
पूतना वध प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि राक्षसी पूतना ने बालकृष्ण को विषपान कराने का प्रयास किया, किंतु भगवान ने स्तनपान के बहाने ही उसका उद्धार कर दिया। इसके बाद माता यशोदा ने पंचगव्य से भगवान का स्नान कराया।
मुखदर्शन प्रसंग का उल्लेख करते हुए व्यास जी ने कहा कि जब गोपबालकों ने शिकायत की, कि श्रीकृष्ण ने मिट्टी खा ली है, तो माता यशोदा ने उनके मुख में संपूर्ण ब्रह्मांड का दर्शन किया। किंतु भगवान की इच्छा से माता उस दिव्य दृश्य को तत्काल भूल गईं, ताकि लीलाएं यथावत चल सकें।
गोवर्धन पूजा प्रसंग में वर्णन किया गया कि जब ब्रजवासियों ने इंद्र की पूजा त्यागकर गोवर्धन पर्वत की पूजा शुरू की तो इंद्र क्रोधित होकर मूसलाधार वर्षा करने लगे। तब श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी अंगुली पर गोवर्धन उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की और इंद्र का अहंकार दूर किया।
कथा व्यास ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को अपने धर्मग्रंथ—गीता, भागवत और रामायण—का अध्ययन अवश्य करना चाहिए। यही संस्कार अगली पीढ़ी को भी धार्मिक और नैतिक मूल्यों से जोड़े रखेंगे।
कथा के दौरान “राधे कृष्ण गोविंद गोपाल” जैसे भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे।
कथा में जल विहार समिति अध्यक्ष के. जी. अग्रवाल, आर. जी. गुप्ता, प्रदीप कुमार गुप्ता, रमेश सर्राफ, पंकज सोनी,मनोज आनंद, पीताम्बरा सिद्ध पीठ कुलपहाड़ के धर्मकिशोर पाठक (गुरु जी) सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।
