उत्तर प्रदेश में महिला स्वावलंबन की नई तस्वीर, जनपद जालौन ग्राम पीरौना की संतोषी ने हुनर को बनाया रोजगार का आधार

उत्तर प्रदेश में महिला स्वावलंबन की नई तस्वीर

स्वयं सहायता समूह से जुड़कर खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में बढ़ाया कदम, S.R. बेकर्स के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को दे रहीं मजबूती
राहुल कुमार

उरई जालौन। उत्तर प्रदेश सरकार की महिला सशक्तीकरण और ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में संचालित प्रयासों का असर अब गांवों में दिखाई देने लगा है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को संगठित कर उन्हें स्वरोजगार और उद्यमिता से जोड़ने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों ने ग्रामीण महिलाओं के लिए आगे बढ़ने के नए अवसर खोले हैं। इसी वातावरण में जनपद जालौन के कोंच विकासखंड के ग्राम पीरौना की संतोषी ने खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में अपना उद्यम खड़ा कर आत्मनिर्भरता की राह चुनी है। संतोषी, पत्नी राजकुमार, खाती बाबा महिला स्वयं सहायता समूह और रोशनी महिला ग्राम संगठन से जुड़ी हैं। समूह से जुड़ने के बाद मिले मार्गदर्शन और आत्मविश्वास ने उन्हें अपने हुनर को व्यवसाय का रूप देने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने ‘S.R. बेकर्स’ के नाम से खाद्य प्रसंस्करण इकाई शुरू की, जहां वर्तमान में आलू पेटीज, बिस्कुट, पनीर पेटीज और क्रीम रोल सहित विभिन्न खाद्य उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इसके अलावा पेस्ट्री, फिंगर, बर्गर, मोमोज और कोल्ड ड्रिंक्स की बिक्री भी की जाती है। उत्तर प्रदेश सरकार खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 के माध्यम से निवेश, तकनीक, मूल्य संवर्धन और बाजार सुविधा को प्रोत्साहित कर रही है। नीति में स्वयं सहायता समूहों, किसान उत्पादक संगठनों और किसानों के लिए विकेंद्रीकृत खाद्य प्रसंस्करण एवं भंडारण को भी प्रोत्साहन देने का प्रावधान है। इसी प्रकार संतोषी को प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना (PMFME) के अंतर्गत 40 हजार तथा ग्राम संगठन से 1 लाख की सहायता प्राप्त हुई। इस सहयोग से उन्होंने अपने कारोबार के लिए आवश्यक संसाधन जुटाए और उत्पादन को आगे बढ़ाया। वर्तमान में उनके उद्यम का लगभग 40 लाख का वार्षिक टर्नओवर है तथा व्यवसाय से करीब 2 लाख प्रतिमाह आय प्राप्त हो रही है। संतोषी अब अपने उद्यम को और बड़े स्तर पर ले जाने की तैयारी में हैं। इसके लिए उन्हें आधुनिक मशीनरी, कच्चे माल और फर्नीचर की आवश्यकता है तथा कारोबार के विस्तार के लिए लगभग 10 लाख से 20 लाख तक के ऋण की जरूरत है। उनका लक्ष्य गुणवत्तापूर्ण खाद्य उत्पाद तैयार कर जालौन के साथ-साथ प्रदेश के अन्य जनपदों में भी बाजार विकसित करना है। संतोषी का प्रयास इस बात का उदाहरण है कि जब ग्रामीण महिलाओं को स्वयं सहायता समूह, प्रशिक्षण, वित्तीय सहयोग और बाजार से जुड़ने के अवसर मिलते हैं, तो उनका पारंपरिक हुनर आर्थिक गतिविधि का मजबूत आधार बन सकता है। उत्तर प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण और महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने वाली नीतियों का उद्देश्य भी स्थानीय संसाधनों में मूल्य संवर्धन, रोजगार के अवसरों का सृजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देना है।

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