मौदहा में पट्टे की जमीन पर कब्जे के आरोप, करोड़ों की भूमि को लेकर उठे सवाल

इलाही तालाब के किनारे जनजाति समुदाय के लोगों को आवंटित आवासीय भूमि का मामला पट्टे की जमीन की खरीद-फरोख्त पर रोक के बावजूद कथित कब्जे और लेनदेन के आरोप, प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी निगाहें संदीप धुरिया मौदहा। कस्बे के इलाही तालाब के किनारे अनुसूचित जनजाति समुदाय के लोगों को आवंटित आवासीय पट्टों की जमीन को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि करोड़ों रुपये कीमत की इस भूमि पर कुछ प्रभावशाली लोगों ने कब्जा कर लिया है। मामले में कथित तौर पर दबाव बनाकर जमीन पर कब्जा करने और कुछ पट्टाधारकों को लालच देकर भूमि का सौदा कराने की बात भी कही जा रही है।आरोपों के मुताबिक, पट्टे की जमीन पर कब्जे और कथित खरीद-फरोख्त के इस मामले में स्थानीय स्तर पर एक सिंडिकेट सक्रिय है। यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ प्रभावशाली लोगों के संरक्षण के चलते लंबे समय से इस मामले में प्रभावी आवाज नहीं उठाई गई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।पट्टे की जमीन के हस्तांतरण पर उठे सवाल पट्टे की भूमि को लेकर नियमों और आवंटन की शर्तों का पालन सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि आवंटित जमीन पर अवैध कब्जा किया गया है या नियमों के विपरीत उसका हस्तांतरण हुआ है, तो अब तक संबंधित अभिलेखों की जांच और कार्रवाई की स्थिति क्या है?प्रशासन की भूमिका पर निगाहें मामले में कुछ स्थानीय प्रभावशाली लोगों और कथित तौर पर खादीधारी व्यक्तियों की भूमिका को लेकर भी आरोप लगाए जा रहे हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति की संलिप्तता जांच और ठोस साक्ष्यों के आधार पर ही तय हो सकती है।अब निगाहें हमीरपुर जिला प्रशासन पर टिकी हैं।

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