बृजभूषण सिंह परिहार ‘अकेला’
उत्तर प्रदेश की राजनीति में संदेश अक्सर लखनऊ से नहीं, गांव और विद्यालय से आते हैं। अभी संपन्न हुए विधान परिषद के शिक्षक और स्नातक खंड के चुनाव ने वही संदेश दे दिया है – 2027 के आम चुनाव में इंडिया गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिलेगा। 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। समाजवादी पार्टी अपने निर्माण वर्ष से लेकर आज तक पहली बार 37 लोकसभा सीटें जीती। यह कोई सामान्य जीत नहीं, यह सामाजिक न्याय की राजनीति की वापसी थी। अब विधान परिषद के चुनाव परिणामों ने उस जीत पर मुहर लगा दी है। ध्यान दीजिए, इन चुनावों में मतदाता आम नहीं होता। इसमें अत्यधिक शिक्षित स्नातक मतदाता और शिक्षक मतदाता ही वोट देते हैं। ये ही समाज के अगुआ हैं, कर्णधार हैं, बुद्धिजीवी वर्ग हैं। जब बुद्धिजीवी वर्ग किसी सरकार के खिलाफ खड़ा हो जाए, तो समझ लीजिए कि आम जनता का मन बहुत पहले ही बदल चुका है। बुद्धिजीवी वर्ग का रुझान 2027 के विधानसभा चुनाव का स्पष्ट संकेत है। यह परिवर्तन सिर्फ उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है। अगर बड़ी दृष्टि से देखा जाए तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी दक्षिणपंथी ताकतें कमजोर हो रही हैं। यूरोप में दक्षिणपंथ चरमरा रहा है। दक्षिण अमेरिका के ब्राजील में दक्षिणपंथ को करारी हार झेलनी पड़ी। अमेरिकन रिपब्लिकन्स कठिन दौर से गुजर रहे हैं और इजराइल में भी घमासान मचा हुआ है। इतिहास गवाह है, जब-जब जनता के मूल मुद्दे – रोजगार, महंगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य – हाशिए पर धकेले जाते हैं, तब-तब दक्षिणपंथी राजनीति का पतन शुरू होता है। उत्तर प्रदेश इसका अपवाद नहीं है। आज उत्तर प्रदेश के गांव में किसान खाद के लिए लाइन में है, नौजवान रोजगार के लिए भटक रहा है, शिक्षक अपने सम्मान के लिए लड़ रहा है। ऐसे में विधान परिषद के शिक्षित मतदाताओं ने जो फैसला दिया है, वह सिर्फ एक सीट का फैसला नहीं, पूरे प्रदेश की नब्ज है। इसलिए यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि उत्तर प्रदेश सरकार की उल्टी गिनती प्रारंभ हो चुकी है। 2024 लोकसभा ने रास्ता दिखाया, विधान परिषद चुनाव ने दिशा तय की और 2027 विधानसभा उस दिशा में मंजिल तय करेगी।
उत्तर प्रदेश सरकार की उल्टी गिनती प्रारंभ
