कानपुर। आज हिंदी पखवाड़े के उपलक्ष्य मे अंतरराष्ट्रीय काव्य मंच ‘मन से मंच तक’ के तत्वावधान मे नामी गिरामी कवियों की संगोष्ठी डॉ. कमलेश शुक्ला कीर्ति की अध्यक्षता एवं कानपुर इकाई की अध्यक्ष डाक्टर हेमा पांडेय जी, व मुख्य अतिथि आदरणीया मधु प्रधान जी के सानिध्य में सम्पन्न हुई। गोष्ठी की शुरुआत सुनीता तिवारी जी की वाणी वंदना हे शारदे मां, हे शारदे मां मैं उतारूं आरती, प्रस्तुत कर मां शारदे को शब्दों के सुमन अर्पित किए । तत्पश्चात विशिष्टअतिथि डॉ.अन्नपूर्णा बाजपेई जी ने जय शंकर प्रसाद जी की रचना अरे कहीं देखा है तुमने। रेखा श्रीवास्तव जी हरिवंश राय बच्चन जी की रचना जो बीत गई सो बीत गई माधुरी द्विवेदी जी ने गोपालदास नीरज जी की रचना स्वप्न झरे फूल से ।सुनीता गुप्ता जी ने रामधारी सिंह दिनकर जी की रचना किस्मत न राहें रोकती, रीता सिंह जी ने मैथिली शरण गुप्त जी की रचना ‘नर हो न निराश करो मन को ,विशिष्ट अतिथि डॉ.सुषमा सिंह जी ने खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी सुनीता तिवारी जी ने कवि प्रदीप जी की रचना तेरे काँटो से भी प्यार तेरे फूलों से भी प्यार किरण मिश्रा जी ने राम ने बढ़ाया कर लेने को नीलकमल विशिष्ट अतिथि पुष्पा कलराज जी ने मैथिली शरण गुप्त जी की मेरी भाषा में जब तोते भी राम नाम कहते हैं, मधु प्रधान जी ने छिप छिप कर अश्रु बहाने वालो डॉ.कमलेश शुक्ला कीर्ति जी ने जय शंकर प्रसाद जी की रचना क्या कहती हो सुंदर नारी, प्रस्तुत कर महिला काव्य मंच को चरमोत्कर्ष पर पहुंचा दिया। यह सभी कालजई रचनाएं हिंदी पखवाड़ा के उपलक्ष्य में कालजई रचनाकारों को यादकर समर्पित की गई। कानपुर इकाई की उपाध्यक्ष किरण मिश्रा जी ने अत्यंत कुशल संचालन के साथ काव्य गोष्ठी को सम्पन्न करवाया। इस सफलतम गोष्ठी के कवियों की डॉ हेमा पांडेय ने करतल ध्वनि से सराहना करके उनका उत्साहवर्धन किया। अंत में डॉ.कमलेश शुक्ला ‘कीर्ति जी’ ने सभी का हृदय से आभार प्रकट कर अगले माह तक के लिए गोष्ठी स्थगित कर दिया गया। यह जानकारी गोष्ठी मे उपस्थित रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी रहे श्री घनश्याम त्रिपाठी ने दी।
मन से मंच तक के मंच पर कवियों की वाणी में उतरी वीणा पाणि
