ISI समर्थित प्रोपेगेंडा: खालिस्तानी नेता पन्नू का भड़काऊ बयान और सिख समुदाय की राष्ट्रभक्ति पर सवाल”

“ISI के इशारे पर नाचता आतंकी पन्नू: सिख सैनिकों को भारत विरोधी बनाने की नापाक साजिश”

“पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा का मोहरा बना पन्नू: पहलगाम हमले को भारत पर थोपने की नाकाम कोशिश”

(विशेष संवाददाता से)
समाचार लेख:
डॉ. पर्विंदर सिंह

  • एशिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स पुरस्कार विजेता – अमेरिका द्वारा लिखा गया है।

ISI के इशारे पर नाचता आतंकी पन्नू: सिख सैनिकों को भारत विरोधी बनाने की नापाक साजिश पर डॉ. पर्विंदर सिंह द्वारा यह रिपोर्ट:

पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI एक बार फिर भारत के खिलाफ प्रोपेगेंडा फैलाने में जुट गई है। इस बार उसने खालिस्तानी आतंकी और वांछित अपराधी गुरपतवंत सिंह पन्नू को अपने हथियार के रूप में इस्तेमाल किया है। हाल ही में पन्नू ने एक शर्मनाक बयान देते हुए कहा कि यदि पाकिस्तान और भारत के बीच युद्ध होता है, तो सिख सैनिक भारत के लिए नहीं लड़ेंगे। इस बयान के पीछे साफ तौर पर पाकिस्तान के इशारे पर खड़ी साजिश दिखाई देती है।

पन्नू का यह बयान ऐसे समय आया है जब पहलगाम आतंकी हमले को लेकर पाकिस्तान की मीडिया भारत पर झूठे आरोप मढ़ रही है। ISI के प्रोत्साहन से पन्नू ने न केवल सिख कौम के नाम पर देश को बांटने की कोशिश की है, बल्कि अमरीका, कनाडा और अन्य देशों में बसे सिख समुदाय के बीच भी भ्रम फैलाने का प्रयास किया है।

पन्नू का बयान ईरान समर्थित हुती विद्रोहियों की कट्टर इस्लामी सोच से प्रेरित प्रतीत होता है। पाकिस्तान पहले ही हुती गुट को समर्थन देने के लिए बदनाम हो चुका है और अब उसी सोच को पन्नू भारत के खिलाफ भड़का रहा है। जबकि सच्चाई यह है कि सिख समुदाय ने भारत की स्वतंत्रता संग्राम से लेकर पाकिस्तान के खिलाफ लड़ाइयों में हमेशा अग्रिम मोर्चे पर बलिदान दिया है। सिख इतिहास वीरता और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक है, जिसे पन्नू जैसे बिकाऊ तत्व कभी मिटा नहीं सकते।

विशेषज्ञों का मानना है कि पन्नू का बयान केवल मानसिक दिवालियापन और इस्लामोफोबिक आतंकवादी सोच का नतीजा है। वह भूल रहा है कि भारत के सिख सैनिकों ने न सिर्फ मुगल साम्राज्य के अत्याचारों से लोहा लिया, बल्कि पाकिस्तान के खिलाफ भी 1947, 1965 और 1971 के युद्धों में अदम्य साहस दिखाया।

दरअसल, ISI के पैसे से पलने वाले खालिस्तानी आतंकी गुट अब हताश हो चुके हैं। जिस प्रकार भारत में अर्बन नक्सलियों का सफाया हो रहा है और वे अब सरकार से समझौते की भीख मांग रहे हैं, उसी तरह खालिस्तानी मंसूबे भी दम तोड़ते दिख रहे हैं। ‘ऑल आउट ऑपरेशन’ और मजबूत राष्ट्रीय इच्छाशक्ति के चलते भारत के सैनिकों की ताकत को पूरी दुनिया ने माना है। पाकिस्तान भी कई युद्धों में इसकी कीमत चुका चुका है।

पन्नू का ‘खालिस्तान’ एक खोखला सपना है, जिसे भारत की एकता, सिख समुदाय की देशभक्ति और जनता का विश्वास कभी पूरा नहीं होने देगा। समय आ गया है कि ऐसे देशद्रोही तत्वों के खिलाफ वैश्विक स्तर पर कठोर कार्रवाई की जाए।

डॉ. पर्विंदर सिंह

  • एशिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स पुरस्कार विजेता – (अमेरिका)

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