बगैर कागजातों के रात दिन चल रहा लकड़ी का अवैध कारोबार


रियल मीडिया नेटवर्क
भरुआ सुमेरपुर। वन विभाग की मिलीभगत से सैकड़ों ट्रैक्टर लकड़ी प्रतिदिन कस्बे में लाकर बाहर भेजी जा रही है। लकड़ी किससे खरीदी गई किसने बेची है। इसकी जानकारी लकड़ी लाने वाले को भी नहीं है। इसके बाद यह वन विभाग से कागज बनवाकर आराम से बाहर भेज रहे हैं।
कस्बे में जलाऊ लकड़ी की आड़ में लकड़ी का बड़ा कारोबार चल रहा है। सैकड़ो ट्रैक्टर लकड़ी प्रतिदिन बाहर से कस्बे में लाई जाती है फिर ट्रकों में लादकर कानपुर, आगरा, मेरठ, दिल्ली, पंजाब आदि जगहों को भेजी जाती है। जलाऊ लकड़ी की आड़ में कारोबारी टिंबर की लकड़ी का व्यापार धड़ल्ले से टैक्स की चोरी करके कर रहे हैं क्योंकि ट्रक में क्या लदा गया है। इसकी कभी कोई जांच नहीं होती है। वन विभाग आंख मूंदकर कागज बना देते हैं। इसी तरह मंडी परिषद भी कार्यालय में ही बैठकर गेट पास थमा देते हैं जबकि नियम यह है कि व्यापारी को किसानों से खरीदी गई लकड़ी का खसरा जमा करना होता है। खसरे में पेड़ों की संख्या एवं उम्र दर्ज होनी चाहिए तभी उपज का आकलन किया जा सकता है और इसी आकलन के आधार पर वन विभाग कागजात जारी करके मंडी को गेट पास की अनुमति देता है लेकिन यहां ऐसा कुछ भी नहीं हो रहा है सभी आंखें बंद करके धड़ल्ले से कारोबार की अनुमति दिए हुए हैं।
वन क्षेत्राधिकारी अजय कुमार वर्मा ने बताया कि जलाऊ लकड़ी की भी चेकिंग का अधिकार है। वह टीम बनाकर बाहर से आने वाली ट्रैक्टरों की जांच करने के साथ-साथ बाहर जाने वाले ट्रकों की भी जांच कराएंगे। इससे यह स्पष्ट होगा कि जलाऊ लकड़ी की आड़ में अन्य लकड़ी तो बाहर नहीं जा रही है। उन्होंने बताया कि अभी हाल में ही डीएफओ ने जांच करने के आदेश दिए हैं। बता दें कि कस्बे में एक दर्जन फर्में लकड़ी का कारोबार कर रही है। इनमें कई फर्में बाहर की है। ज्यादातर कारोबार रात के अंधेरे में किया जाता है बाहर से भी लकड़ी रात में कस्बे में लाई जाती है और बाहर भी ट्रकों में रात को ही भेजी जाती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *