उत्साह से लबरेज सपा की बदलती राजनीतिक रणनीति

विशेष आलेख

जगदीश श्रीवास्तव विशेष संवाददाता

तेजी से परिवर्तित होते राजनीतिक घटनाक्रम के चलते समाजवादी पार्टी का नेतृत्व भी अपनी पार्टी को मजबूती प्रदान करने के लिए अपडेट कर रहा है। हालांकि पहलगाम हमले के बाद भारत द्वारा अपनी ताकत का बेखौफ प्रदर्शन के बाद देशभर में स्थितियां काफी परिवर्तित हो गई हैं। फिर भी समाजवादी पार्टी का नेतृत्व यथा संभव मेहनत करके अपने समाजवादीजनों को जोड़े रखने और मजबूती प्रदान करने हेतु पुरजोर प्रयास में है।
समाजवादी पार्टी की सबसे बड़ी दिक्कत है कि उसके नेता हैं जो गाहे-बगाहे एक न एक ऐसा बयान जारी कर देते हैं। जो खुद पूरी पार्टी को कटघरे में खड़ा कर देता है। इस बयान बाजी के परिधि में स्वयं सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी सम्मिलित हो जाते हैं। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा गाय के गोबर से बदबू आना, सपा सांसद रामजीलाल सुमन द्वारा पूरे क्षत्रिय समाज को ही देश भक्ति के चलते कटघरे में खड़ा देना, पार्टी महासचिव रामगोपाल यादव द्वारा कर्नल व्योमिका सिंह की जाति बताना और उनके राष्ट्रीय प्रवक्ता आनंद भदौरिया द्वारा डिबेट में ऊटपटांग तथ्य रखना, पार्टी को कमजोर ही कर देता है। उसके बाद सफाई का कोई मतलब नहीं रहता।चाहे पूर्व मुख्यमंत्री क्षत्रिय समाज के लोगों को मलहम लगाने के प्रयास में सत्ता आने के बाद गोमती रिवर फ्रंट पर महाराणा प्रताप की प्रतिमा लगवाने की घोषणा करें।
दरसल समाजवादी पार्टी के जनक पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव का व्यक्तित्व ऐसा था, कि उन्होंने कभी भी किसी के प्रति अमर्यादित आचरण नहीं किया। विरोधियों को छोड़ भी दें तो चाहे उन्हें की पार्टी के ही नेतागण अमर सिंह, बेनी प्रसाद वर्मा आदि ही रहे हों।भले ही इन दोनों ने नेताजी की काफी लानत-मानत की, लेकिन नेताजी के मुंह से इन दोनों के खिलाफ कभी भी एक शब्द नहीं निकला और यह उनकी उदारता ही थी कि वापस आने के बाद दोनों को ही राज्यसभा में भेजा।उत्तर से दक्षिण तक और पूर्व से पश्चिम तक के नेताओं के नेताजी से व्यक्तिगत संबंध बड़े ही घनिष्ट रहे और इसी का लाभ वह जीवन भर लेते रहे। भाजपा जैसी पार्टी ने उन्हें अयोध्या में कार सेवकों का हत्यारा बताया और इसी भाजपा ने मृत्योपरांत उनको पद्म विभूषण से सम्मानित किया। ऐसे में या तो भाजपा पहले ही गलत थी या बाद में।
अब अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश सहित जहां-जहां उनकी पार्टी का वजूद है, वहां-वहां परिवर्तन कर रहे हैं। जहां विकल्प ही नहीं है, वहां अपनी पार्टी को जस का तस बनाए हुए हैं।महाराष्ट्र में उनके विधायक अबू आजमी ही समाजवादी पार्टी के सब कुछ है, भले ही वह अपने वक्तव्य के चलते हिंदू मतदाताओं को नाराज कर देते हों।वही उत्तर प्रदेश में लगभग प्रत्येक जिले में वह जनपदीय नेतृत्व को फिर से पुनर्गठित कर रहे हैं। वहीं पड़ोसी प्रांत मध्य प्रदेश में उन्होंने पार्टी की बागडोर मौदहा (हमीरपुर) से विधायक रहे और पूर्व श्रम मंत्री बादशाह सिंह को सौंप कर उन्हें वहां का प्रभारी बनाया है। इसमें कोई संदेह नहीं की बादशाह सिंह का लंबा राजनीतिक जीवन कर्मठता से भरा हुआ है। आज भी उनके प्रशंसकों और समर्थकों की लंबी कतार है और मध्य प्रदेश के पूर्व अध्यक्ष गौरीशंकर यादव को किनारे कर अब अखिलेश यादव मध्य प्रदेश में बादशाह सिंह पर भरोसा रखे हुए हैं। वहीं बंगाल में ममता बनर्जी से उनका राजनैतिक रिश्ता बेहद ही अच्छा है। फिर भी किरणमय नंदा वहां पार्टी के सर्वे सर्वा हैं।
हर पार्टी की तरह समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव भी चाहते हैं कि उनकी पार्टी को उत्तर प्रदेश में सत्ता और देश में राजनीतिक पार्टी का दर्जा प्राप्त हो जाए। हालांकि वह मुख्यमंत्री के बेटे होने के चलते अपनी अकड़ से बाहर नहीं आ पा रहे हैं। जबकि इसके ठीक विपरीत उनके पिता मुलायम सिंह नेता जी बेहद ही अनुभवी राजनेता रहे हैं।बिना मतलब बोलना उनका शगल नहीं था और विरोधियों की तादाद कम से कम रहे, इसकी उनको गंभीर चिंता बनी रहती थी। इसका राजनीतिक लाभ उनको जीवन भर मिलता रहा। राजनीतिक लाभ पाने के उद्देश्य नेताजी कभी-कभी दो कदम पीछे भी चले जाते थे।
उत्तर प्रदेश के हर जनपद में अब अखिलेश यादव अपनी पार्टी में नए नेतृत्व को उभारने की जुगत में हैं और धरातल पर भी लागू कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि इसका उनको कितना लाभ विधानसभा चुनाव में मिलेगा। लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में काफी अच्छा प्रदर्शन अखिलेश के लिए कहीं न कहीं विधानसभा चुनाव के परिपेक्ष में हानिकारक कहा जा सकता है।क्योंकि लोकसभा में पार्टी के जीतते ही उनके कार्यकर्ता बेलगाम हो गए थे, जिसका संकेत भी अच्छा नहीं गया था। उनका पी डी ए का फार्मूला कितना कारगर होगा? यह तो भविष्य पर ही निर्भर है।

One thought on “उत्साह से लबरेज सपा की बदलती राजनीतिक रणनीति

  1. बहुत सुंदर एवं तथ्यात्मक विश्लेषण।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *