जगदीश श्रीवास्तव
राठ हमीरपुर। चिल्ली हत्याकांड का एकमात्र आरोपी गांव का ही रामबाबू जघन्य हत्यारा रहा है। चिल्ली हत्याकांड के पूर्व उसने दो हत्याएं लोहे की रॉड से नृशंसा पूर्वक की थीं।जिनका मुकदमा अभी भी उरई जालौन में लंबित है।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि रामबाबू ने वर्षों पूर्व अपने पिता को ही मार-मार कर अधमरा कर दिया था, काफी उपचार के बाद वह ठीक हुए थे। उसके बाद रामबाबू ने अपने बाबा को भी बुरी तरह पीटा था। चिल्ली गांव के लोग बताते हैं कि रामबाबू ने अपनी चाची के साथ ही जबरदस्ती की थी। उसकी मां ने सल्फास खाकर आत्महत्या कर ली थी।यह देखकर उसका भयभीत भाई गांव- घर छोड़कर गुजरात में कहीं मेहनत मजदूरी करने लगा था।
कुछ समय व्यतीत होने के बाद रामबाबू उरई जनपद के चुरखी थाना क्षेत्र में पानी पुरी का धंधा करने लगा, वही उसकी मुलाकात एक लड़की से हो गई। दोनों एक दूसरे के संपर्क में आए। रामबाबू उससे शादी करना चाहता था, परंतु लड़की बालिग़ नहीं हुई थी। उसके बालिग़ होने में 1 साल का समय था। कहीं लड़की की शादी उसका पिता अन्यत्र न कर दे। इसके चलते उसने एक हत्या लोहे की रॉड मार कर की और लड़की के पिता को ही फंसाने का प्रयास किया। परंतु पुलिस ने अंततः रामबाबू को गिरफ्तार कर लिया और जेल भेज दिया। जेल से जमानत पर बाहर आने पर उसके साथ जेल में बन गया उसका एक मित्र भी बाहर आ गया। रामबाबू इसी के साथ रहने लगा और इधर-उधर घूमते हुए एक दिन ग्राम व थाना डकोर जनपद उरई (जालौन) में किसी भवन के पीछे दारू पीते समय अपने दोस्त की ही लोहे की रॉड मारकर हत्या कर दी। न्यायालय ने रामबाबू की केस का निर्णय सुनाने हेतु रामबाबू को बुलाया, न आने पर रामबाबू के विरुद्ध गैर जमानती वारंट भी जारी किया गया। परंतु तब तक रामबाबू उरई जनपद छोड़कर अपने गांव चिल्ली के आसपास ही इधर-उधर भटकने लगा। उसे पैसे की जरूरत पड़ी, तो उसने गांव की ही एक घर में चोरी कर ली और उसके दो दिन बाद ही चोरी के उद्देश्य से गांव में ही रात्रि में घर में घुसा, परिजनों के जाग जाने पर अनिल राजपूत व पत्नी दोनों को लोहे की कपलिंग से बुरी तरह मारा जिससे 26 वर्षीय गीता देवी की वहीं मृत्यु हो गई और गंभीर घायल उसका पति अनिल अभी भी कानपुर के रीजेंसी हॉस्पिटल में अपना उपचार कर रहा है।
घटनास्थल पर मौजूद दंपति की तीन वर्षीय बेटी शान्वी को भी रामबाबू ने पटक दिया, जिससे कि उसके सिर में भी चोट लगी और शान्वी का इलाज भी जारी है।
हत्याकांड की खुलासे के लिए उच्च अधिकारियों के कड़े निर्देश के परिपालन में कोतवाली पुलिस, जरिया पुलिस और एसओजी की टीम लगाई गई और अंततः रामबाबू की नाका बंदी करते हुए दोनों ओर से चली फायरिंग में रामबाबू के दोनों पैरों में गोली लग गईं।घायल रामबाबू को देखने के लिए राठ में भारी भीड़ इकट्ठी हुई और सभी का कहना था कि ऐसे साइको किलर का तो अंत ही किया जाना उचित रहता। परंतु पुलिस की भी अपनी कुछ विवशताएं थी, जिस कारण घायल रामबाबू आज भी जिंदा है।
बताया जाता है की रामबाबू पहले राठ के ही किसी व्यक्ति के यहां शरण पाता रहा है और शुरू से ही अपराधिक गतिविधियों में संलग्न रहा है।
