
जगदीश श्रीवास्तव
राठ/हमीरपुर। एक तरफ प्रदेश सरकार संगठित अपराध और माफियाओं पर नकेल कसने के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर आम नागरिक लगातार अपराध और धोखाधड़ी का शिकार हो रहे हैं। ऑनलाइन ठगी, सरेआम लूट, चोरी और टप्पेबाजी की घटनाओं ने आम जनजीवन को असुरक्षित बना दिया है। सवाल यह उठता है कि जनता अपनी मेहनत की कमाई को आखिर कहां सुरक्षित रखे? बढ़ते डिजिटल लेनदेन के साथ ही साइबर अपराधों में भी अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। लोग एटीएम, यूपीआई, और नेट बैंकिंग के जरिए लेनदेन करते हैं, लेकिन ठग नई-नई तकनीकों से आम लोगों को झांसे में लेकर उनकी ओटीपी लेकर खाता साफ कर दे रहे हैं। बैंक ग्राहक जागरूकता की कमी और साइबर सुरक्षा उपायों की सुस्ती का फायदा उठाकर ठग आए दिन लोगों को शिकार बना रहे हैं। अधिकांश मामले दर्ज भी नहीं हो पाते और पीड़ितों को न्याय नहीं मिल पाता। आसपास के क्षेत्रों में दिनदहाड़े लूट और टप्पेबाजी की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। कुछ ही दिन पहले इंडियन बैंक राठ के अंदर ही टप्पेबाजी की घटना हो चुकी है।चोरों व अपराधियों के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि वे मुख्य बाजारों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में भी वारदात करने से नहीं हिचकते। स्थानीय प्रशासन और पुलिस पर सवाल उठ रहे हैं। आम जनता का कहना है कि शिकायतों के बाद भी समय पर कार्रवाई नहीं होती, जिससे अपराधियों के हौसले और बढ़ते जा रहे हैं। वहीं, अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का रवैया भी संवेदनहीन प्रतीत होता है। एक ओर सरकार ‘डिजिटल इंडिया’, ‘मेक इन इंडिया’, और अत्याधुनिक मिसाइल निर्माण जैसे तकनीकी विकास की बात करती है, दूसरी ओर साइबर ठगों पर लगाम लगाने में पूरी तरह विफल दिखाई देती है। नगद रखो तो लूट का डर, बैंक में रखो तो ऑनलाइन ठगी का खतरा। ऐसी स्थिति में आम आदमी का भरोसा टूटता जा रहा है। जनता जानना चाहती है कि क्या उसके लिए सुरक्षा केवल एक चुनावी वादा भर है? और क्या ‘विकसित भारत’ की राह पर आम आदमी की सुरक्षा प्राथमिकता में है भी या नहीं?
