रियल मीडिया नेटवर्क
भरुआ सुमेरपुर। देश की आजादी के संघर्ष के प्रति अग्निधर्मा के पक्षधर क्रांतिकारियों के मद्देनजर वर्णिता संस्था के तत्वावधान में विमर्श विविधा के अन्तर्गत जिनका देश ऋणी है के तहत एक बेजोड़ आदिवासी सूरमा बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि पर संस्था के अध्यक्ष डा. भवानीदीन ने श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि बिरसा मुंडा सही अर्थों में एक देशधर्मी युवा देशभक्त थे। उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है। इनका जन्म 12 नवम्बर 1875 को बंगाल प्रेसीडेंसी के रांची जिले के उलिहातु गांव में सुगना मुंडा और कर्मी मुंडा के घर हुआ था। अंग्रेज अधिकारी आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन पर कब्जा कर रहे थे। फलतः बिरसा मुंडा ने एक धार्मिक संगठन खड़ा कर गोरों का विरोध किया। आदिवासियों के हितों के संरक्षण के लिए संघर्ष किया। कुछ समय बाद ये पकड़े गए। इन्हें रांची जेल में बंद किया गया। जहां पर इनकी मृत्यु के भ्रमित कारण बताये गये। पहले पता चला कि हैजे के कारण फिर पता चला कि ज़हर देने से इनकी 9 जून 1900 को करीब 24 वर्ष की उम्र में यह दुनिया छोड गये। इस श्रृद्धांजलि कार्यक्रम में अशोक अवस्थी, दिलीप अवस्थी, प्रेम, प्रिन्स, सागर, संतोष, रिचा, आशुतोष, विकास आदि शामिल रहे।

