मुफलिसी के शिकार बांदा के एक कलमकार ने तोडा दम


अशोक निगम
बांदा / मुफलिसी ने बांदा के एक अच्छे कलमकार सौरभ श्रीवास्तव ‘दीपू’ को असमय ही निवाला बना लिया। शनिवार की सुबह शहर के मोहल्ला कटरा स्थित निज निवास में उनका निधन हो गया। कुछ समय से बीमार चल रहे थे। रोटी के लाले हों तो इलाज का संकट समझा जा सकता है। उस पर शराब का दुर्गुण जानलेवा साबित हुआ। शाम को केन तट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। बंधु बांधवों,पत्रकारों,समेत अनेक गणमान्य मौजूद रहे।

क्राइम रिपोर्टिंग में हमेशा रहे आगे, दस्यु दलों से भी साध लेते थे संपर्क

आज, जागरण और हिंदुस्तान आदि अखबारों में बांदा से चित्रकूट और हमीरपुर तक सेवाएं दे चुके करीब 50 वर्षीय पत्रकार सौरभ श्रीवास्तव दीपू क्राइम रिपोर्टिंग में हमेशा आगे रहे। खबर के लिए दस्यु गिरोहों से संपर्क की बदौलत एक बार तो उन्हें ‘आ बैल मार’ वाले हालात से गुजरना पड़ा। फोन सर्विलांस में डालकर पुलिस ने शिकंजा कसने की कोशिश की। लेकिन कुछ सीनियर पत्रकारों ने पुलिस को कन्विंस किया और बला टल गई। लेकिन, थोड़ा रवैया बदल कर दीपू ने क्राइम कवरेज जारी रखा।

मां के निधन से पेंशन खत्म होने पर टूट गया हौसला

कुछ साल पहले मां के न रहने पर पत्रकार दीपू को फकत मुफलिसी ने आ घेरा। पिता पुलिस महकमे में मुलाजिम थे। उनके निधन के बाद मां की पेंशन से घर की गाड़ी चलती रही। मां के निधन से पेंशन गई और दो वक्त की रोटी को ब्रेक लग गए। दो दुकानों से मिलने वाला मात्र ₹ 4 हजार का किराया बिजली,पानी,आदि का बिल चुकाने के बाद गुजर बसर के लिहाज से नाकाफी था। इधर-उधर हाथ पांव मारकर जैसे तैसे गुजारा होता था। लेकिन मुफलिसी में बीमारी की दस्तक ने हौसला तोड़ दिया। टूटे हौसले के साथ दीपू ने दम तोड़ दिया।

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