यह राठ है! विराट !जहां “मृतक” कराता है रजिस्ट्री, और दाहसंस्कार के बाद ‘मृतका’ घर लौट आती है


जगदीश श्रीवास्तव

राठ हमीरपुर। राठ क्षेत्र इन दिनों ऐसे अजीबो-गरीब और चौंकाने वाले मामलों का गवाह बन रहा है, जिन पर विश्वास करना मुश्किल हो रहा है। कभी मृतक व्यक्ति आकर रजिस्ट्री कर जाता है, तो कभी दाह संस्कार के बाद मृतका जीवित अवस्था में घर लौट आती है। प्रशासनिक शिथिलता और भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा से जनता हैरान और हताश है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि “यहां सब कुछ संभव है—बस सिस्टम की मंजूरी होनी चाहिए।” चाहे अवैध खनन हो, ओवरलोड ट्रकों का कहर, नशीले पदार्थों का खुला व्यापार या सरकारी विभागों में रिश्वत के बिना कोई काम न होना—हर मोर्चे पर अव्यवस्था और अनियमितता साफ देखी जा सकती है।
सब रजिस्ट्रार कार्यालय में मृतक के नाम से रजिस्ट्री हो जाना कोई आश्चर्य की बात नहीं रही। इस प्रकरण की जांच एसडीएम द्वारा की जा रही है, लेकिन राजपत्रित अधिकारियों के बीच ‘पद और पहुंच’ के समीकरण जांच की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
एक और हैरान कर देने वाला मामला तब सामने आया, जब एक अज्ञात शव की पहचान परिजनों ने की, और उसका अंतिम संस्कार भी कर दिया गया। लेकिन 10 दिन बाद वही युवती जीवित अवस्था में घर लौट आई।
राठ का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भी बदहाली की मिसाल बन चुका है। सूत्रों के अनुसार प्रसव के दौरान महिलाओं से अवैध रूप से पैसे वसूले जाते हैं। मरीजों को बाहर से दवाएं मंगवाने के लिए मजबूर किया जाता है, जिससे कर्मचारियों को मोटा कमीशन मिलता है।
अधीक्षक का रवैया मनमाना है और वे खुलेआम दावा करते हैं कि उनका तबादला कोई नहीं करवा सकता नगर व आसपास के इलाकों में अवैध मिट्टी खनन धड़ल्ले से चल रहा है। पहले जहां एक स्थान पर यह कार्य होता था, अब चार स्थानों से खनन जारी है।मौरंग से लदे ओवरलोड ट्रक सड़कें तोड़ रहे हैं और प्रशासन मौन है।देशी शराब, गांजा और ऑनलाइन सट्टे का कारोबार खुलेआम फल-फूल रहा है। जनता का भरोसा टूटता जा रहा है। लोग कह रहे हैं कि अब न नेता सुनते हैं, न अधिकारी कुछ करते हैं। सिस्टम का बोलबाला है और आम आदमी बस तमाशबीन बनकर रह गया है।
यह केवल एक चेतावनी नहीं, एक पुकार है—यदि अब भी सुधार नहीं हुआ, तो हालात और बिगड़ते देर नहीं लगेगी।

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