13 साल से चल रहा था फर्जी डिग्री का कारोबार, मोहरें और लैपटॉप बरामद, मास्टरमाइंड समेत चार गिरफ्तार

13 साल से चल रहा था फर्जी डिग्री का कारोबार

कानपुर। कानपुर कमिश्नरेट पुलिस की एसआईटी, साइबर सेल और बेकनगंज पुलिस की संयुक्त टीम ने विभिन्न विश्वविद्यालयों और बोर्डों की फर्जी मार्कशीट, डिग्री व अन्य शैक्षणिक दस्तावेज तैयार करने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गिरोह के मास्टरमाइंड समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, मुखबिर की सूचना पर चमनगंज क्षेत्र में छापेमारी की गई, जहां आरोपी फर्जी दस्तावेज तैयार करते हुए पकड़े गए। गिरफ्तार आरोपियों में जियाउल हसन उर्फ समीर उर्फ आतिफ, नूरुद्दीन, हसन आसिफ और आमिर अहमद शामिल हैं। पूछताछ में खुलासा हुआ कि गिरोह पिछले 13 वर्षों से देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों की फर्जी डिग्री और मार्कशीट तैयार कर मोटी रकम वसूलता था। इनके नेटवर्क का विस्तार भारत के कई राज्यों के अलावा विदेशों तक फैला हुआ था। पुलिस के मुताबिक फर्जी दस्तावेज सऊदी अरब, कनाडा और ब्रिटेन तक बेचे जाने के साक्ष्य मिले हैं। छापेमारी के दौरान 62 कूटरचित मार्कशीट, डिग्री और प्रमाणपत्र, दो लैपटॉप, एक डेस्कटॉप कंप्यूटर, कलर प्रिंटर, तीन हार्ड डिस्क, 141 विश्वविद्यालयों की मोहरें, 80 होलोग्राम, 24 डाई, 830 सादे पेपर और बड़ी मात्रा में अन्य सामग्री बरामद की गई। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह का सरगना जियाउल हसन दो बार लंदन जा चुका है और वहीं से अपने नेटवर्क का संचालन करने की कोशिश कर रहा था। उसके खिलाफ पूर्व में भी इसी तरह के मामले दर्ज होने की जानकारी मिली है। आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उन्हें न्यायालय में पेश किया जा रहा है। पुलिस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने और अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए जांच में जुटी है।

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