जगदीश श्रीवास्तव
राठ हमीरपुर। नगर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) बदइंतजामी और अव्यवस्था का जीता-जागता उदाहरण बन गया है। हालत यह है कि न तो पर्याप्त डॉक्टर हैं, न विशेषज्ञ। जरूरी उपकरणों पर धूल जम रही है और मरीज इलाज की उम्मीद में यहां से वहां भटकते नजर आते है। सीएचसी में न तो बैठने की ठीक सुविधा है और न ही पर्याप्त दवाएं। मजबूरी में मरीज सरकारी योजनाओं का लाभ पाने की चाहत में यहां पहुंचते हैं, वरना यह अस्पताल अक्सर वीरान ही रहता। वर्षों से ब्लड बैंक की मशीन बेकार पड़ी है, खून जांचने की आई एटीएम मशीन भी गायब है। कई बार मरीजों को बाहर की महंगी दवाएं लिख दी जाती हैं, जिससे गरीबों पर दोहरी मार पड़ती है। महिला चिकित्सालय में प्रसूताओं को सरकारी योजनाओं का थोड़ा बहुत लाभ जरूर मिलता है, लेकिन बदले में उन्हें अपनी जेब भी ढीली करनी पड़ती है। पुरुष चिकित्सालय सिर्फ मेडिकल सर्टिफिकेट और पोस्टमार्टम के लिए ही जाना जाता है।
इलाज के नाम पर सिर्फ रेफर कर देना यहां की पहचान बन चुकी है। अफसोस की बात यह है कि न तो कोई सामाजिक संगठन आवाज उठा रहा है और न ही जनप्रतिनिधि इस बदहाली को गंभीरता से ले रहे हैं।ग्रामीणों की मांग है कि जिम्मेदार अधिकारी सीएचसी का हाल देखें और इसे वास्तव में इलाज का केंद्र बनाएं, न कि सिर्फ नाम का अस्पताल।

