श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन शुकदेव जन्म और परीक्षित श्राप की कथा का भावपूर्ण वर्णन

राठ/हमीरपुर।श्री मेला जल विहार समिति राठ के तत्वावधान में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन कथा वाचक मानस माधुरी पाठक जी ने श्रोताओं को शुकदेव जन्म, परीक्षित श्राप और अमर कथा का अद्भुत प्रसंग सुनाया।
उन्होंने बताया कि नारद जी के प्रश्न पर जब माता पार्वती ने भगवान शंकर से उनके गले की मुंडमाला का रहस्य पूछा तो शिवजी ने बताया कि यह सभी मुंड उनके ही विभिन्न जन्मों के हैं। पार्वती जी ने हंसते हुए कहा—“क्या हर जन्म में मैं ही मरती रही, आप क्यों नहीं?” इस पर भगवान शिव ने कहा कि उन्होंने अमर कथा सुनी है। पार्वती जी ने भी कथा सुनने का आग्रह किया। कथा सुनते समय उनके समीप एक तोते का अंडा रखा था, जिसमें से श्री शुकदेव प्रकट हुए और कथा के प्रभाव से अमर हो गए। यही शुकदेव बाद में व्यास जी के आश्रम पहुंचे और 12 वर्षों तक गर्भ में रहने के बाद प्रकट हुए।
कथा के दौरान पाठक जी ने समझाया कि भगवान की कथा मानव जीवन को वैराग्य, ज्ञान और भक्ति के मार्ग पर ले जाती है। राजा परीक्षित के श्राप के कारण ही पृथ्वीवासियों को भागवत कथा सुनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। उन्होंने बताया कि भागवत शब्द के चार अक्षर भक्ति (भा), ज्ञान (ग), वैराग्य (व) और त्याग (त) का प्रतीक हैं।
वाचक जी ने छह प्रश्न, निष्काम भक्ति, नारद जी का पूर्व जन्म, परीक्षित का जन्म, कुंती देवी की विपत्ति में भी भगवान से शरण की प्रार्थना तथा भीष्म पितामह के अद्भुत देह त्याग का वर्णन करते हुए श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
कथा में समिति के सदस्यों के सहित सैकड़ों भक्तगण उपस्थित रहे।

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