रियल मीडिया नेटवर्क
भरुआ सुमेरपुर। यमुना बेतवा पुल के जर्जर होने की पुष्टि होने के बाद प्रशासन द्वारा ओवरलोड में लगाए गए प्रतिबंध असफल साबित हो रहे हैं। केन नदी की खदानों से ओवरलोड बालू लदे ट्रक रात के अंधेरे में धड़ल्ले से बेतवा यमुना नदी के पुल से गुजारे जा रहे हैं। इनको निकलवाने में राठ तिराहे और मुख्यालय के रानी लक्ष्मीबाई तिराहा में बैठने वाले लोकेटरों की अहम भूमिका रहती है। लोकेशन की हरी झंडी मिलते ही यह फर्राटा भरते हुए दोनों पुलों से गुजर कर कानपुर की सीमा में पहुंचकर ओझल हो जाते हैं।
मुख्यालय से गुजरी बेतवा एवं यमुना नदी में बने पुलों की क्षमता 40 टन गुजारने की है। लेकिन दोनों पुलों से मौजूदा समय में 50 से 80 टन क्षमता का लोड गुजर रहा है। विगत दिनों एनएचआई की टीम ने दोनों पुलों से ओवरलोड गुजारने से साफ मना किया था। प्रशासन ने इसके लिए टीमें भी बनाकर तैनात कर रखी है। लेकिन इसका ज्यादा असर ओवरलोड पर नहीं पड़ा है। दिन में जरूर राहत रहती है। लेकिन रात में जैसे ही दस बजता है, ओवर लोड निकलने का खेल शुरू हो जाता है। सबसे ज्यादा ओवरलोड ट्रक सिसोलर क्षेत्र से गुजरी केन नदी की खदानों से आते हैं। यह सिसोलर से लेकर पंधरी तक दिन में बालू लाद कर आ जाते हैं और लोकेशन का इंतजार करने लगते हैं। जैसे ही हमीरपुर में बैठे लोकेटर लोकेशन देते हैं। यह फर्राटा भरने लगते हैं और सैकड़ो की तादाद में ओवरलोड ट्रक प्रशासन की आंखों में धूल झोंक कर तड़के तक गुजरते रहते हैं। गुरुवार को तड़के 6:00 बजे कस्बे की रेलवे क्रॉसिंग के समीप से गुजर रहे ऐसे ओवरलोड ट्रकों को कमरे में कैद किया गया। सिसोलर की ओर से आने वाले यह ट्रक कस्बे से गुजरकर हाईवे में चढ़कर हमीरपुर व कानपुर की ओर निकल जाते हैं।

