कांग्रेस की वर्तमान विचारधारा में कुछ बदलाव हुआ है क्या ?

 भाजपा की सफलताओं के बने कीर्तिमान कांग्रेस की अनैतिक नीतियों की बदौलत ही बने हैं ! किन्तु देश का दुर्भाग्य कहें य सौभाग्य कहें समझ नहीं आता क्योंकि जब इतिहास देखते हैं पढ़ते हैं तो लगता है कि विगतकाल में कांग्रेसी सरकारों के समय का लगभग सम्पूर्ण विपक्ष जो कांग्रेस की भ्रष्ट कुत्सित नीतियों के विरुद्ध ही संगठित हुआ था, कुछ कांग्रेस के नेताओं ने तो स्वयं कांग्रेस की नीतियों के विरोध में ही बाहर जाकर कांग्रेस के विरुद्ध नई पार्टियां बनाई थीं ! जिनमें से कुछ पार्टियां समय समय पर गठबंधन करके कांग्रेस के ही विरोध में केन्द्र और प्रदेशों में सरकार बनाने में सफल हुई हैं ! कांग्रेस की सरकार द्वारा थोपे गये आपातकाल के दौरान आ.जयप्रकाश नारायण जी के द्वारा आवाहन करने पर विपक्ष एकजुट हुआ था,तब कांग्रेस पार्टी की निरंकुशता से भारत आजाद हुआ था ! लेकिन गठबंधन में आपसी तालमेल न बन पाने के कारणों का लाभ उठाते हुए कांग्रेस पार्टी की कुटिल नीतियों के कारण तत्कालीन प्रधानमंत्री आ.मोरारजी भाई देसाई जी की सरकार को भी असफलता का मुंह देखना पड़ा था ! तभी कई प्रदेशों में क्षेत्रीय पार्टियों का भी उदय कांग्रेस व कांग्रेस सरकारों के विरोध में हुआ था,कांग्रेस के विरोध में सरकारें भी बनी कुछ लम्बे समय तक कार्यरत रहीं तो कुछ थोड़े थोड़े समय में कार्यरत रही हैं !
         स्वतंत्रता आन्दोलन से लेकर स्वतंत्रता मिलने के बाद स्वतंत्र भारत में कांग्रेस पार्टी की नीतियों व कांग्रेस सरकारों की क्रियापद्धति का सदैव विरोध करने वाला संगठन पहले जनसंघ जो अब भाजपा के रूप में विश्व का सबसे बड़ा राष्ट्रवादी और हिन्दूवादी संगठन बन गया है ! ने सदैव कांग्रेस पार्टी कांग्रेस सरकारों की कुत्सित नीतियों का विरोध किया और कांग्रेस सरकारों की विफलताओं को देश और समाज के सामने निरंतर उजागर करते रहे,धीरे धीरे देश जनसंघ/ भाजपा की ओर आकर्षित होता रहा,पहले कुछ प्रदेशों में बाद में राष्ट्रीय स्तर पर भी भाजपा की अन्य दलों द्वारा समर्थित सरकारें भी बनीं,भारत रत्न मा.अटलबिहारी बाजपेई जी ने भाजपा के नेत्रृत्व में गठबंधन की सरकार रहते हुए भी कई ऐसी सफल योजनाओं को क्रियान्वित किया जो आज भी भारत को प्रगति के पथ पर ले जाने में सहायक हो रही हैं,लेकिन कांग्रेस पार्टी को यह प्रगति पशंद नहीं आई,सत्ता से दूर रहना कांग्रेस को गवारा नहीं था,इसलिए सत्ता की आतुरता में कांग्रेस पार्टी ने अपने कई विरोधी दलों से बेमेल गठबंधन करके देश की सत्ता पुनः प्राप्त कर ली, लेकिन कांग्रेस पार्टी ने अपनी पुरानी विचारधारा में कोई नैतिक परिवर्तन नहीं किया बल्कि देश भर में भ्रष्टाचार की घटनाएं व तुष्टीकरण करने का खुला खेल खेला गया ! जिससे देश भर में कांग्रेस और उसकी सहयोगी पार्टियों के प्रति जागरूक देश की जनता के मन में आक्रोश पैदा हुआ और भाजपा के प्रति आकर्षण पैदा हुआ !
        भारत में एक बार फिर भाजपा के प्रति देश की आम जनता ने विश्वास किया और पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने का जनादेश देकर मा. नरेन्द्र भाई मोदी के नेत्रृत्व में पूर्ण विश्वास व्यक्त किया ! विगत बारह वर्षों से लगातार तीसरी बार आ.नरेन्द्र भाई मोदी देश के प्रधानमंत्री पद पर आशीन हैं,एनडीए के नेत्रृत्व में उन्होंने भारत का मान देश और दुनियां में बढ़ाया है,सबके साथ व सबके विकास का संकल्प लेकर आगे बढ़ रहे हैं लेकिन कांग्रेस पार्टी देश की सरकार में आने के लिए इतनी व्याकुल है कि सत्ता प्राप्ति के लिए भारत विरोधी शक्तियों का परोक्ष और अपरोक्ष सहयोग लेकर,भारतीय सनातन धर्म संस्कृति को धता बताकर अपने धुर विरोधियों को साथ लेकर बिना किसी नई पूर्वनिर्धारित कार्य योजना के देश की सत्ता सरकार पर पुनः काबिज होना चाहते हैं !
      कांग्रेस पार्टी की जिन नीतियों का विरोध करके भाजपा सत्ता के शिखर पर पहुंच गई है, क्या कांग्रेस उन्ही नीतियों के रहते हुए य उन्हीं नीतियों पर चलते हुए भारत की सत्ता पर एक बार दुबारा पहुंच सकती है ? जिस कांग्रेस पार्टी संगठन एवं सरकार के विरोध में तमाम विपक्षी पार्टियों का जन्म ही हुआ था,वही पार्टियां और संगठन आज कांग्रेस पार्टी के साथ में गठबंधन करके सिर्फ भाजपा का विरोध करने एवं सिर्फ भाजपा को सत्ता से हटाने के उद्देश्य से कांग्रेस के पीछे हाथ बांधे खड़े हैं ? आखिर ऐसी क्या मजबूरी है ? क्या कांग्रेस की नीतियों में कोई भी बदलाव हुआ है ? जिन कांग्रेस की नीतियों का विरोध डा.राम मनोहर लोहिया जी ने किया था, जिसका विरोध डा.श्याम प्रसाद मुखर्जी जी ने किया था ? जिसका विरोध संविधान निर्मात्री सभा के अध्यक्ष डा.भीमराव अम्बेडकर जी ने किया था ? जिसका विरोध श्रद्धेय बाल ठाकरे जी ने किया था ? जिसका विरोध जयप्रकाश नारायण जी ने किया था ? जिसका विरोध सरद पवार जी ने किया था,जिसका ही विरोध ममता बनर्जी ने भी किया था,उसी कांग्रेस के साथ इंडी गठबंधन के रूप में आज विपक्ष क्यों और किन कारणों से खड़ा है ? उपरोक्त सभी अति गम्भीर व महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर देश की आम जनता जनार्दन को अत्यन्त गम्भीरता पूर्वक राष्ट्रहित में चिंतन अवश्य करना चाहिए ! क्योंकि इन दिनों खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध के कारण से लगभग पूरी दुनियां कच्चे पेट्रोलियम पदार्थों एवं रसोई गैस की आपदा से जूझ रही है भारत भी उससे अछूता नहीं है,लेकिन यदि हम वैश्विक स्तर पर निगाह डालें तो हमारे देश की सरकार ने अभी तक कुशल प्रबंधन करने में सफलता पाई है ! लेकिन भारत का विपक्ष खासकर कांग्रेस के नेता राहुल गांधी देश में भ्रम का वातावरण एवं अफवाहे फैलाकर भय पैदा करके देश वासियों को गुमराह कर रहे हैं,डरा रहे हैं,देश के जेन.जी को अराजकता के लिए उकसा रहे हैं ! राहुल गांधी के साथ उनके इंडी गठबंधन के सहयोगी दलों के नेता गण भी कुछ घुमा फिरा कर उनकी बात का समर्थन करते हुए देखे जा रहे हैं ! ऐसी स्थितियों में देश वासियों को इन विपक्षी पार्टियों के नेताओं से अतिरिक्त सावधान रहने की अति आवश्यकता है ।
                  एक विचार प्रवाह
                 विद्यासागर त्रिपाठी
           मूसानगर कानपुर देहात उप्र.

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