भरुआ सुमेरपुर। तीन दशक पूर्व बना कलौलीजार बांकी मार्ग कलौलीजार के पास चलने लायक नहीं बचा है करीब दो किलोमीटर सड़क का नामोनिशान मिट जाने से एक दर्जन से ज्यादा गांवों के लोगों को 30 किलोमीटर से ज्यादा का चक्कर काटकर ब्लाक मुख्यालय आने जाने को मजबूर होना पड़ रहा है।
कलौलीजार के प्रधान अरविंद यादव ने बताया कि कलौलीजार बांकी मार्ग का निर्माण तत्कालीन राज्यपाल मोतीलाल बोरा के द्वारा कराया गया था। उस समय प्रदेश में 6 माह का राष्ट्रपति शासन लागू था। इसके बाद करीब 2 किलोमीटर सड़क की मरम्मत आज तक नहीं कराई गई है। इससे सड़क में बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। कहीं-कहीं सड़क का नामोनिशान मिट गया। इस सड़क से कलौलीजार, ललपुरा, स्वासा खुर्द, स्वासा बुजुर्ग, मोराकांदर, कुम्हऊपुर, उजनेड़ी, सहुरापुर, सिकरी आदि गांव के लोगों का ब्लाक कार्यालय तक आना-जाना होता है। सड़क खराब होने के कारण इस मार्ग में किसी तरह के साधन नहीं होने से लोगों को 30 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाकर आना जाना पड़ रहा है।

