
राठ/हमीरपुर। श्री मेला जल विहार समिति राठ के तत्वावधान में चल रही श्रीराम कथा के छठवें दिन वृंदावन धाम से पधारे श्री धन्वंतरि जी महाराज ने भगवान श्रीराम और माता सीता की पहली भेंट, स्वयंवर प्रसंग तथा शिव-धनुष से जुड़े रहस्यों का रोचक वर्णन किया।
महाराज ने बताया कि जनकपुरी के राजमहल में सुरक्षित शिव-धनुष साधारण नहीं था, बल्कि उस युग का ब्रह्मास्त्र माना जाता था। राजा जनक ने सीता स्वयंवर की शर्त रखी थी कि जो भी वीर इस धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाएगा, वही सीता से विवाह का अधिकारी होगा। सभा में अनेक वीरों के असफल होने के बाद भगवान श्रीराम ने धनुष उठाया और प्रत्यंचा चढ़ाते ही वह टूट गया। इसके बाद माता सीता का विवाह श्रीराम से संपन्न हुआ।
कथा के दौरान उन्होंने यह भी बताया कि महर्षि कण्व की तपस्या से उत्पन्न दिव्य बाँस से विश्वकर्मा ने दो महान धनुषों—शारंग और पिनाक—का निर्माण किया था। शारंग भगवान विष्णु को तथा पिनाक भगवान शिव को अर्पित हुआ। यही पिनाक धनुष बाद में जनक वंश में धरोहर के रूप में सुरक्षित रहा और सीता स्वयंवर का आधार बना।
धनुष टूटने पर परशुराम जी के क्रोधित होने और फिर विश्वामित्र तथा लक्ष्मण के समझाने पर उनके शांत होने का प्रसंग भी विस्तार से सुनाया गया।
कथा स्थल पर वातावरण भक्ति और श्रद्धा से सराबोर रहा। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।
