उरई (जालौन) की सियासत में भूचाल! PDA रिपोर्ट में 22 भर्तियों पर आरक्षण गड़बड़ी के गंभीर आरोप


रियल मीडिया राहुल कुमार
उरई । आयोजित एक प्रेस वार्ता के बाद जालौन की राजनीति में बड़ा भूचाल आ गया है। PDA (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) की ओर से जारी “PDA ऑडिट अंक-1” रिपोर्ट में 22 अलग-अलग भर्ती प्रक्रियाओं में आरक्षण व्यवस्था के उल्लंघन और हजारों पदों पर कथित अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन इस रिपोर्ट ने राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया है और पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गई है।

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 69 हजार शिक्षक भर्ती, वन विभाग भर्ती और बांदा कृषि विश्वविद्यालय भर्ती सहित कई चयन प्रक्रियाओं में आरक्षण के मानकों का पालन सही तरीके से नहीं किया गया।

👉 69 हजार शिक्षक भर्ती में OBC को 27% के बजाय 3.86% प्रतिनिधित्व मिलने का आरोप
👉 SC वर्ग को 21% के बजाय 16.2% प्रतिनिधित्व का दावा
👉 ST वर्ग को शून्य प्रतिनिधित्व का आरोप
👉 वन विभाग भर्ती में 655 पदों में 88 पद कम मिलने का दावा

PDA नेताओं का कहना है कि यह मामला केवल नौकरी का नहीं बल्कि सामाजिक न्याय और संविधान से जुड़े अधिकारों का गंभीर मुद्दा है और इसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।

इस प्रेस वार्ता में सपा से जुड़े कई नेता मौजूद रहे, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—
दीपराज गुर्जर (सपा जिलाध्यक्ष), सांसद नारायण दास अहिरवार, सुरेंद्र बजरिया, कुसुमलता सक्सेना, रश्मि पाल, गुड्डू मेहवा, अजहर बेग, दीपू त्रिपाठी, जमालुद्दीन पप्पू, महेंद्र कठेरिया, श्री राम पाल, सलामन सिद्दीकी, रामेन्द्र त्रिपाठी और नगर अध्यक्ष इमरान उल्ला।

सपा जिलाध्यक्ष दीपराज गुर्जर ने कहा कि यह डाटा अखिलेश यादव के निर्देश पर तैयार किया गया है और इसे जनता के बीच ले जाया जाएगा। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि जो लोग जनता की आवाज उठा रहे हैं, उन पर दबाव बनाया जा रहा है और मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं।

वहीं विपक्ष ने माधौगढ़ और अन्य क्षेत्रों के मुद्दों को जोड़ते हुए प्रशासनिक कार्रवाई पर भी सवाल उठाए।

फिलहाल सरकार की ओर से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। मामला अब जिले से निकलकर प्रदेश की सियासत में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है।

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