​शिक्षक विनीत मुख्यमंत्री के हाथों पाएंगे राज्य अध्यापक पुरस्कार

​शिक्षक विनीत मुख्यमंत्री के हाथों पाएंगे राज्य अध्यापक पुरस्कार

. संघर्ष, नवाचार और समर्पण की अनूठी मिसाल
​. शिवराजपुर के मूल निवासी हैं विनीत
. सुबह 40 किलोमीटर का सफर तय करके समय से पहुंचते हैं स्कूल
. जीवन में अनुशासन को सबसे ऊपर रखकर बढ़ते हैं आगे
. शिक्षकों के संगठन टीएससीटी के हैं जिला पदाधिकारी

अवनीश यादव
बिल्हौर(कानपुर)। शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान और नवाचारों के लिए उच्च प्राथमिक विद्यालय अंता विकास खंड रसूलाबाद, जनपद कानपुर देहात के प्रभारी प्रधानाध्यापक विनीत कुमार मिश्र को प्रतिष्ठित ‘राज्य अध्यापक पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान केवल उनके व्यक्तिगत परिश्रम का परिणाम नहीं है, बल्कि यह उन अनगिनत बच्चों, अभिभावकों और सहकर्मियों के विश्वास की जीत है जिन्होंने उनकी इस शैक्षिक यात्रा को निरंतर आगे बढ़ाया है। बताते चलें कि वर्षों पहले कुछ खास जनपद और ब्लॉक के शिक्षक ही ऐसे पुरस्कार हासिल कर पाते थे। लेकिन टीचरों की नई भर्ती में आए काबिल शिक्षकों ने इस मिथक को तोड़ दिया है। वह नित नए नए प्रयोग कर रहे हैं। जिसका परिणाम है कानपुर देहात जिले के अति पिछड़े विकास खंड के अति पिछड़े गांव अन्ता के स्कूल टीचर को मिला यह पुरस्कार। सुबह करीब 40 किलोमीटर का सफर तय करके स्कूल पहुंचने वाले विनीत अनुशासन को सबसे ऊपर रखते हैं। वह रोजाना समय से स्कूल पहुंचते हैं और यही वजह है कि उनके बच्चे भी अनुशासन का पाठ बढ़िया ढंग से सीख गए हैं। जिसने असली मायने में उन्हें इस पुरस्कार का हकदार बनाया है। शिक्षण सेवा के शुरुआती दौर में संसाधनों की कमी, बच्चों की अनियमित उपस्थिति और अभिभावकों की सीमित भागीदारी जैसी कई चुनौतियाँ सामने आईं। लेकिन शिक्षक विनीत कुमार मिश्र ने हार मानने के बजाय हर चुनौती को अवसर में बदला। उन्होंने यह साबित कर दिखाया कि यदि साधन सीमित हैं, तो नवाचार सीमित नहीं होने चाहिए। ​उन्होंने कक्षा को एक प्रयोगशाला की तरह उपयोग किया। स्थानीय एवं कम लागत वाली सामग्री से टीएलएम (टीचिंग लर्निंग मटेरियल), गतिविधि आधारित शिक्षण, विषय आधारित कक्षा सज्जा, गणितीय और वैज्ञानिक खेल, तथा आईसीटी एवं दीक्षा जैसे डिजिटल संसाधनों का बेहतरीन उपयोग किया। उनके इन प्रयासों से बच्चों में गणित और विज्ञान का डर दूर हुआ और कक्षा में उनकी सक्रिय भागीदारी बढ़ने लगी।

​परिवार और सहधर्मिणी का मिला संबल
इस प्रेरणादायक सफर में उनकी जीवनसंगिनी श्रीमती लक्ष्मी मिश्रा (जो स्वयं शिवराजपुर के संस्कृत विद्यालय में शिक्षिका हैं) का विशेष सहयोग रहा। दोनों का शिक्षक होना विद्यालय को केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि जीवन का एक अहम हिस्सा बनाता है। उनकी दोनों बेटियाँ सिद्धि और समृद्धि की प्रेरणा और माता-पिता के संस्कारों ने उन्हें हमेशा ‘आज से बेहतर कल’ बनाने की सीख दी।

​पुरस्कार के बाद बढ़ गई जिम्मेदारी
राज्य अध्यापक पुरस्कार प्राप्त करने के बाद विनीत कुमार मिश्र का मानना है कि यह सम्मान उनके लिए किसी मंजिल का अंत नहीं, बल्कि एक नई जिम्मेदारी की शुरुआत है। उनका संकल्प है कि वे अपने अनुभवों और नवाचारों को अधिक से अधिक शिक्षकों तक पहुँचाएँ ताकि सरकारी विद्यालयों का हर बच्चा बिना किसी सीमा के अपने सपनों को पूरा कर सके। शिक्षक विनीत कुमार मिश्रा ने बताया कि 5 सितंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रदेश के सभी चयनित शिक्षकों को पुरस्कृत कर सम्मानित करेंगे। उन्हें विभाग से यात्रा टिकट प्राप्त हो गया है। वह कल वहां के लिए रवाना होंगे।

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