उरई जिला कारागार का साप्ताहिक निरीक्षण: जमानत के बाद भी जमानतदार न मिलने से जेल में बंद कैदियों को छुड़वाएगा विधिक प्राधिकरण

जेल के मुख्य गेट पर चल रहा था मरम्मत कार्य, सचिव मनाली चंद्रा ने बैरकों का किया भ्रमण – हिंदी दिवस पर लगा विधिक साक्षरता शिविर

राहुल कुमार उरई जालौन

माननीय जनपद न्यायाधीश अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जालौन के निर्देशानुसार आज दिनांक 14.09.2026 को सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्रीमती मनाली चंद्रा द्वारा जिला कारागार उरई का साप्ताहिक भ्रमण एवं विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया।

सचिव महोदया ने जेल की विभिन्न बैरकों का भ्रमण कर वहां निरुद्ध बंदियों से पूछताछ की और उनकी समस्याओं को जाना-समझा। इस दौरान जेल के मुख्य दरवाजे पर मरम्मत कार्य चलता हुआ पाया गया।

निरीक्षण के दौरान उन्होंने जेल प्रशासन को सख्त निर्देश दिए कि –
जिन बंदियों की जमानत सक्षम न्यायालय से हो चुकी है, लेकिन जमानतदार (जमानतगीर) न होने के कारण रिहा नहीं हो पा रहे हैं, उनकी सूची अविलंब जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यालय को भेजी जाए, ताकि प्रभावी पैरवी कर उन्हें शीघ्र रिहा कराया जा सके।
जिन बंदियों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है, उनकी जमानत राज्य की ओर से जिला अधिकार प्राप्त समिति के माध्यम से करवाई जाए।
कोई भी ऐसा बंदी जिसका निजी अधिवक्ता न हो या जिसकी ठीक से पैरवी न हो रही हो, उसे तत्काल निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराई जाए।

सचिव महोदया ने बंदियों को मिलने वाली विधिक सहायता, उनके मुकदमों की पैरवी, महिला बंदियों व उनके साथ रह रहे बच्चों की चिकित्सा व खान-पान व्यवस्था के बारे में भी जानकारी ली।

इसके बाद उन्होंने मुलाकाती क्षेत्र में बंदियों के परिजनों की सहायता हेतु स्थापित लीगल एड हेल्प डेस्क का भी निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान बंदियों से समस्या पूछे जाने पर किसी ने कोई समस्या नहीं बताई।

निरीक्षण के उपरांत हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में / लोक अदालत के लाभ विषय पर विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन कर सचिव श्रीमती मनाली चंद्रा ने शिविर का शुभारंभ किया।

शिविर में असिस्टेंट प्रथम LADCS श्री अभिषेक पाठक ने बताया कि हिंदी दिवस प्रत्येक वर्ष 14 सितंबर को मनाया जाता है। 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को केंद्र सरकार की आधिकारिक भाषा घोषित किया था। इसी महत्व को प्रतिपादित करने के लिए 1953 से हर साल हिंदी दिवस मनाया जाता है। भारत की स्वतंत्रता के बाद हिंदी को आधिकारिक भाषा बनाने में व्यौहार राजेंद्र सिंह, काका कालेलकर, हजारीप्रसाद द्विवेदी, सेठ गोविंद दास आदि साहित्यकारों ने अथक प्रयास किए।

इस अवसर पर जेल अधीक्षक श्री प्रशांत मौर्या, कारापाल श्री प्रदीप कुमार, उप कारापाल श्री अमर सिंह व श्रीमती सुखवती तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के लिपिक श्री शुभम शुक्ला उपस्थित रहे।

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