राहुल कुमार
उरई। किसी बच्चे की आंखों में पल रहे सपनों को साकार करने के लिए यदि थोड़े से सहयोग की जरूरत हो, तो प्रशासन की संवेदनशील पहल उसके जीवन की दिशा बदल सकती है। जनपद जालौन में शुक्रवार को आयोजित जनसुनवाई के दौरान ऐसा ही एक भावुक और प्रेरणादायी प्रसंग सामने आया, जब 14 वर्षीय दिव्यांग बालिका श्रुति ने जिलाधिकारी समीर के सामने पढ़-लिखकर डॉक्टर बनने की अपनी इच्छा जाहिर की। बालिका की पढ़ाई में आ रही बाधाओं को जानकर जिलाधिकारी ने तत्काल संज्ञान लिया और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक व्यवस्थाएं प्राथमिकता से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।जिलाधिकारी समीर अपने कार्यालय कक्ष में सुबह से ही दूर-दराज से आए फरियादियों की समस्याएं गंभीरतापूर्वक सुन रहे थे। इसी दौरान उरई के पाठकपुरा निवासी भगत सिंह अपनी 14 वर्षीय दिव्यांग बेटी श्रुति के साथ पहुंचे। पिता ने बेटी को स्कूल आने-जाने में होने वाली परेशानी से अवगत कराते हुए उसके लिए वॉकर उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। बातचीत के दौरान जब जिलाधिकारी ने पूछा कि श्रुति स्कूल जाती है या नहीं, तो पिता ने बताया कि आवागमन की समस्या के कारण वह स्कूल नहीं जा पा रही है। यह जानकर जिलाधिकारी ने नाराजगी व्यक्त की और स्पष्ट किया कि किसी भी बच्चे की शिक्षा सुविधाओं के अभाव में बाधित नहीं होनी चाहिए।इसके बाद जिलाधिकारी ने स्वयं बालिका से संवाद करते हुए पूछा कि वह स्कूल जाना चाहती है या नहीं। श्रुति ने पढ़ने की इच्छा जताते हुए कहा कि वह पढ़-लिखकर डॉक्टर बनना चाहती है। एक दिव्यांग बच्ची के भीतर शिक्षा के प्रति यह उत्साह और भविष्य को लेकर उसकी आकांक्षा सामने आते ही जिलाधिकारी ने उसकी समस्या के त्वरित समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों को मौके पर ही निर्देशित किया। उन्होंने बालिका की पढ़ाई में आ रही बाधाओं को दूर करने और उसे विद्यालय से जोड़ने के लिए तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।जिलाधिकारी ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिए कि श्रुति का उसी दिन विद्यालय में दाखिला कराया जाए तथा उसे स्कूल यूनिफॉर्म, बैग, पुस्तकें, नोटबुक सहित पढ़ाई के लिए आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जाए। वहीं, जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी को निर्देशित किया कि एक घंटे के भीतर बालिका को वॉकर उपलब्ध कराया जाए, जिससे उसे आवागमन में सहूलियत मिले और स्कूल जाने में किसी प्रकार की परेशानी न हो।श्रुति की यह इच्छा कि वह पढ़-लिखकर डॉक्टर बने, केवल एक बालिका का सपना नहीं, बल्कि यह संदेश भी है कि अवसर और सहयोग मिलने पर हर बच्चा अपने भविष्य को नई दिशा दे सकता है। जिलाधिकारी समीर की इस पहल ने जनसुनवाई के उस उद्देश्य को रेखांकित किया, जिसमें शिकायत सुनने के साथ-साथ समस्या का प्रभावी समाधान सुनिश्चित करना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है।
