दिबियापुर विधानसभा क्षेत्र अस्तित्व में आने के बाद से आज तक नहीं जीता सामान्य वर्ग का प्रत्याशी क्या सवर्णों की एकजुटता में है कमी या पिछड़े वर्ग की ही पक्की है यह जमीं

आनंद कुशवाहा औरैया। कहने को तो दिबियापुर विधानसभा क्षेत्र वर्ष 2008 के परिसीमन के बाद वर्ष 2009 में अस्तित्व में आई और इस अनारक्षित सीट पर भले ही सवर्ण मतदाताओं की अच्छी खासी तादाद है लेकिन इसके बावजूद वर्ष 2012 में इस सीट पर हुए विधानसभा के प्रथम चुनाव से लेकर 2022 के चुनाव तक इस लेसीट पर सवर्ण सियासतदारों के पूरी ताकत से चुनाव लड़ने के बावजूद भी इस सीट पर दो बार सपा व एक बार भाजपा का पिछड़े वर्ग का ही प्रत्याशी फतह हासिल कर सका है। इस बार 2027 के संभावित विधानसभा चुनाव को लेकर सवर्ण सियासतदार भी अपनी अपनी पार्टी में टिकट पक्की कराने की कवायद में जुटने की चर्चाएं हैं किंतु इसके बावजूद जमीनी धरातल पर इस विधानसभा क्षेत्र के बने चुनावी समीकरणों के आधार पर सपा के माध्यम से सवर्ण संभावित दावेदारों की चुनावी बैतरणी आसानी से पार होने की संभावनाओं की आमतौर पर चर्चाएं होती नजर आ रही है वहीं दूसरी ओर फिलहाल सभी दलों में इस क्षेत्र में पिछड़े वर्ग का ही जादू चलने की चर्चाएं हवा में तैरती नजर आ रही है। वर्ष 2012 के हुए विधानसभा चुनाव में इस सीट पर सपा के प्रदीप यादव ने 76819 मत हासिल कर विजयश्री प्राप्त की थी वहीं उनके प्रतिद्वंद्वी बसपा के रामजी शुक्ला को 52528 मत हासिल कर दूसरा स्थान हासिल हुआ था। वर्ष 2017 के हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा के लाखन सिंह राजपूत ने 71480 वोट हासिल कर सपा के प्रदीप यादव को पराजित कर भाजपा का परचम फहराया था। इसी चुनाव में बसपा के रामकुमार अवस्थी को 51452 मत हासिल हुए थे और वह तीसरे स्थान पर रहे थे। यही नहीं वर्ष 2022 में हुए विधानसभा चुनाव में इस सीट पर सपा के प्रदीप यादव ने 80865 मत हासिल भाजपा प्रत्याशी लाखन सिंह राजपूत को मात्र 473 वोटो से पराजित कर सपा का परचम फहराया था। इस चुनाव में अरुण कुमार दुबे को 31500 मत हासिल हुए थे। ऐसा नहीं है कि सवर्ण मतदाताओं की इस सीट पर चुनावी समीकरणों के आधार पर कोई कमी है। हां इस बात की चर्चा जरूर हमेशा हवा में तैरती नजर आती है कि सवर्ण मतदाताओं में एकजुटता की कमी जरूर है और शायद इसी के चलते सवर्ण सियासतदार इस अनारक्षित सीट पर भी अपना अस्तित्व जमा पाने में फिलहाल कामयाब नहीं हो पा रहे हैं। हालांकि इस बार पूर्व मंत्री रामजी शुक्ला के अनुज वरिष्ठ सपा नेता लालजी शुक्ला इस विधानसभा क्षेत्र में रात दिन एक करके मतदाताओं में अपनी मजबूत पैठ बनाने की कवायद करते नजर आ रहे हैं और फिलहाल सपा में उनकी दावेदारी भी काफी मजबूत मानी जा रही है और जन चर्चा तो आम यह भी है कि यदि इस बार वह प्रत्याशी बने तो दिबियापुर विधानसभा के चुनावी समीकरण कुछ अलग ही तरह के बने नजर आने की प्रबल संभावना है। हालांकि चुनाव में ऊंट किस करवट बैठेगा यह फिलहाल भविष्य के गर्भ में है लेकिन इस सीट पर सभी राजनीतिक दल अपनी अपनी पकड़ बनाने में जुटे हुए हैं।

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