गोमती के उद्गम से उठी संरक्षण की अलख, चार दिवसीय बंगो गोमती यात्रा शुरूमाधोटांडा से नैमिषारण्य तक गूंजेगा मां गोमती की महिमा का संदेश

बंगाली गांवों से गुजरकर लोगों को नदी की विरासत से जोड़ेगी यात्रापीलीभीत। आस्था की धारा को संरक्षण के संकल्प से जोड़ते हुए मां गोमती के उद्गम स्थल माधोटांडा स्थित गोमत ताल से मंगलवार को बंगो गोमती यात्रा का शुभारंभ हुआ। महामंडलेश्वर एवं बरखेड़ा विधायक स्वामी प्रवक्तानंद महाराज ने उद्गम स्थल पर पहुंचकर विधि-विधान से मां गोमती का पूजन-अर्चन किया। चार दिवसीय इस यात्रा के माध्यम से मां गोमती के इतिहास, सांस्कृतिक महत्ता और संरक्षण का संदेश जन-जन तक पहुंचाने की पहल की गई है।नदियां केवल जलधारा नहीं, बल्कि सभ्यता और संस्कृति की जीवनरेखा भी हैं। इसी भावना के साथ निकली यह यात्रा विभिन्न बंगाली गांवों से होकर गुजरेगी। पहले दिन 28 अक्टूबर को गोमत ताल से रवाना हुई यात्रा आठ से दस बंगाली गांवों से गुजरते हुए रात्रि विश्राम के लिए गोबिया सहराई बंगाली गांव पहुंची। यात्रा में लोगों को मां गोमती की ऐतिहासिक विरासत से परिचित कराने और नदी के संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी का अहसास कराने पर जोर दिया जा रहा है।गांव-गांव पहुंचेगा गोमती संरक्षण का संदेशयात्रा का अगला पड़ाव 29 अक्टूबर को खड़कपुर होगा। इस दिन करीब दस गांवों से होकर यात्रा निकलेगी और वहीं रात्रि विश्राम करेगी। 30 अक्टूबर को 13 गांवों से गुजरते हुए यात्रा रवींद्र नगर (मोहम्मदी) पहुंचेगी। इसके बाद 31 अक्टूबर को पांच गांवों से होते हुए यात्रा पावन नैमिषारण्य पहुंचेगी, जहां स्वामी पगलानंद आश्रम में इसका समापन होगा।आस्था के साथ विरासत बचाने का आह्वानबंगो लोकभारती के राष्ट्रीय संयोजक डॉ. देवज्योति के नेतृत्व में आयोजित इस पहल की सराहना करते हुए मां गोमती के संरक्षण के लिए जनसहभागिता को महत्वपूर्ण बताया गया। कार्यक्रम में लोकभारती के राष्ट्रीय सह सचिव कुंवर नीरज सिंह सहित अनेक वरिष्ठजन भी मौजूद रहे। यात्रा का संदेश साफ है कि नदियों के प्रति आस्था तभी सार्थक होगी, जब उनके अस्तित्व, स्वच्छता और सांस्कृतिक विरासत को बचाने के लिए समाज भी अपनी जिम्मेदारी निभाएगा।

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