*राठ में सक्रिय है गिरोह ,पहले फंसाते,फिर करते ब्लैक मेल,शर्म की वजह से नहीं करते शिकायत..
विशेष संवाददाता
राठ(हमीरपुर)
क्षेत्र में सामाजिक और आर्थिक अपराध का गढ़ माने जाने वाले राठ कस्बे में काफी समय से हनी ट्रैप का धंधा भी बदस्तूर है। इस धंधे में काफी आर्थिक लाभ होता है, परंतु भुक्त भोगी पक्ष एकबारगी और धीरे-धीरे आर्थिक शोषण का शिकार होता रहता है,सामाजिक प्रतिष्ठा तो वैसे भी चली जाती है।पूरे नगर में इस धंधे की चर्चा इस समय जोरों पर है। दरसल पिछले लगभग 3 वर्षों से हनी ट्रैप के धंधे की चर्चा कम या अधिक नगर में होती रही है। परंतु इस समय यह सर्वाधिक कुख्यात और चर्चित है। हनी ट्रैप का मास्टरमाइंड भी कुख्यात है।
नगर में इस समय आधुनिक तकनीकी से युक्त हनी ट्रैप का यह व्यवसाय कई लोगों को संपत्तिवाला बना रहा है, तो इससे पीड़ित बहुतेरे इससे हुए आर्थिक शोषण से अभी भी भयावह हैं। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार नगर क्षेत्र से ही इस हनी ट्रैप का संचालन होता है और आश्चर्यजनक यह है कि इसमें अधिकतर प्रौढ़ वर्ग के लोग फंस जाते हैं।बताया जाता है कि भारतीय जीवन बीमा निगम, मंडी परिषद, विद्युत विभाग और रईस किसान परिवार के युवा-प्रौढ़ लोग हनी ट्रैप में फंस जाने के बाद अपना काफी पैसा गवां चुके हैं।बताते हैं कि हनी ट्रैप में शिकार करने वाली युवती के पास एक व्यक्तिगत बैग होता है, जिसको वह अपने साथ लेकर चलती है और संबंधित कक्ष में उसको अपने हिसाब से रख देती है। उसमें लगा आसानी से ना दिखाई देने वाला कैमरा सारी वीडियोग्राफी कर लेता है और फिर यही वीडियो दिखलाकर अपने शिकार को एक लंबी रकम चुकाने के लिए बाध्य किया जाता है और नेगोशिएट का कार्य भी जल्दी निपटने के उद्देश्य को लेकर किया जाता है।अभी लगभग दो माह पूर्व क्षेत्र के एक धनाढ्य परिवार के किसान से संबंधित व्यक्ति को हनी ट्रैप वालों ने अपने जाल में लपेट लिया और काफी बड़ी रकम लेकर इससे मुक्त किया। इसको संचालित करने वाले बिना कोई पैसा खर्च किए और बिना कोई व्यवसाय किए आराम से अपना जीवन यापन पूरी शान शौकत से व्यतीत कर रहे हैं।इस पूरे प्रकरण की जानकारी पुलिस और नेताओं को भी है। नेताओं के पूरे संरक्षण के आश्वासन के बावजूद पीड़ित कहीं भी लिखित रूप से अपनी शिकायत दर्ज नहीं करा रहे हैं।
पुलिस अवश्य इस मामले में कड़ा रुख अपना सकती है।परंतु अभी तक इस पूरे प्रकरण पर पुलिस की निष्क्रियता हतप्रभ करती है। हालांकि अतीत में इस प्रकार के छोटे-मोटे प्रकरण सामने आने पर तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक मनोज कुमार शुक्ला ने सख्ती के साथ रोक लगाई थी। परंतु इस सरकार के समय आखिर क्यों नहीं समाज के लिए नासूर इस धंधे को संचालित करने वालों के विरुद्ध कोई कार्रवाई हो रही है ?
