डीएम द्वारा गठित उच्च स्तरीय जांच कमेटी ने सभी बिंदुओं पर प्रधान सचिव को पाया दोषीनियमों को ताक में रखकर किए गए भुगतान

भरुआ सुमेरपुर। ग्राम पंचायत बड़ागांव में जिलाधिकारी के आदेश पर गठित उच्च स्तरीय जांच टीम ने प्रधान एवं सचिव को विकास कार्यों में की गई धांधली का दोषी मानते हुए जांच आख्या जिला पंचायत राज अधिकारी को सौंपी है। जहां आख्या प्रस्तुत होते ही जिला पंचायत राज अधिकारी ने ग्राम पंचायत विकास अधिकारी पर विशेष कृपा करते हुए पुनः बड़ागांव में नियुक्त किया है। वहीं डीपीआरओ का यह निर्णय ब्लॉक कार्यालय में चर्चा का विषय बना हुआ।
बड़ागांव निवासी रमेश निषाद ने ग्राम प्रधान हरदौल निषाद, पंचायत सचिव ओमप्रकाश प्रजापति पर विकास कार्यों में धांधली का आरोप लगाकर शिकायत की थी।जांच टीम ने 12 जनवरी 2024 को बगैर कार्य कराए धनराशि निकालने का दोषी पाया था। इसके बाद आनन फानन कार्य कराना शुरू किया गया। इसके बाद पीड़ी ने गांव पहुंचकर मामले की जांच की थी। पीड़ी को मौके पर कार्य मिला था। इसके बाद हुई तकनीकी जांच में 25 अक्टूबर 2024 को प्रधान एवं सचिव पर छह लाख 56 हजार 302 रुपए का गबन सिद्ध हुआ था। इस गबन के बाद जांच में संदेह होने पर जिलाधिकारी ने तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच कमेटी बनाई थी। इस कमेटी में एडीएम नमामि गंगे, अधिशासी अभियंता पीडब्ल्यूडी, डीसी मनरेगा को शामिल किया गया था। जिलाधिकारी द्वारा गठित इस जांच कमेटी ने शिकायतकर्ता की शिकायत के आधार पर पंचायत के 12 कार्यों की बिंदुवार जांच की। टीम ने सभी बिंदुओं पर प्रधान एवं सचिव को दोषी पाया है। जांच रिपोर्ट 23 अप्रैल को जिला पंचायत राज अधिकारी को सौंपी है। जांच रिपोर्ट आने की ठीक अगले दिन 24 अप्रैल को जांच के दौरान पंचायत से हटाए गए सचिव ओमप्रकाश प्रजापति पर विशेष कृपा बरसाते हुए पुनः बड़ागांव में तैनात किया है। डीपीआरओ का यह आदेश ब्लॉक कार्यालय में चर्चा का विषय बना हुआ है। क्योंकि उच्च स्तरीय टीम ने जांच में पाया है कि सचिव ने मनमाने तरीके से फर्मों सहित अन्य भुगतान किए है। जांच में अभिलेखों की गड़बड़ी करने की बात भी सामने आई है। जबकि डीपीआरओ ने आरटीआई के तहत जांच रिपोर्ट 30 अप्रैल को शिकायतकर्ता को उपलब्ध कराई है।

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