बुंदेलखंड की काया में कोढ़, नेता, अफसर, माफिया, दलालों का गठजोड़

जगदीश श्रीवास्तव विशेष संवाददाता

राठ (हमीरपुर)उत्तर प्रदेश का बुंदेलखंड क्षेत्र, जो वर्षों से पिछड़ेपन की मार झेल रहा है, आज भी बुनियादी सुविधाओं और समुचित विकास से वंचित है। विडंबना यह है कि यह वही क्षेत्र है, जो प्रदेश को खनिज संपदा के माध्यम से भरपूर राजस्व प्रदान करता है। विशेष रूप से हमीरपुर और महोबा जैसे ज़िले, विकास की दौड़ में लगातार पिछड़ते जा रहे हैं।
हर चुनावी मौसम में राष्ट्रीय और प्रांतीय नेता क्षेत्र में आते हैं, घोषणाओं की झड़ी लगाते हैं और फिर चुनाव समाप्त होते ही वापस लौट जाते हैं। इन घोषणाओं का कोई ठोस परिणाम ज़मीनी स्तर पर दिखाई नहीं देता। जनप्रतिनिधियों की उदासीनता से क्षेत्र की समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। स्थानीय नेता भी जनसरोकारों की बजाय सामाजिक आयोजनों में भाग लेकर अपनी राजनीतिक जमीन बचाने में लगे रहते हैं। क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति और मध्य प्रदेश से निकटता इसे अपराधों की दृष्टि से संवेदनशील बनाती है। थानों में आए दिन चोरी, डकैती, हत्या, छिनैती और मारपीट जैसी घटनाएं दर्ज होती हैं। वहीं आर्थिक अपराधों की स्थिति भी गंभीर है—जुए और नशे का कारोबार गांव-गांव तक फैल चुका है। पुरुषों का बड़ा वर्ग दिन-रात जुए और नशे में लिप्त है, जबकि महिलाएं खेत और घर की दोहरी जिम्मेदारी निभा रही हैं। गुटखा, तंबाकू, देसी-विदेशी शराब और गांजे की बिक्री में बीते वर्षों में बेतहाशा वृद्धि हुई है। संबंधित विभागीय अधिकारी कभी-कभार ऊपरी निर्देश पर कार्रवाई करते हैं, लेकिन यह केवल दिखावे की कार्रवाई साबित होती है। चौंकाने वाली बात यह है कि अब महिलाएं भी गुटखा सेवन की आदी होती जा रही हैं, जबकि युवा वर्ग गांजे के नशे में डूबता जा रहा है। टैक्स चोरी अब क्षेत्र की एक आम प्रवृत्ति बन चुकी है। दिल्ली से आने वाली बसों के ज़रिए बड़ी मात्रा में बिना टैक्स चुकाए सामान लाया जाता है, जिसे कस्बों के आउटर इलाकों में ही उतार दिया जाता है। एक्सप्रेस वे पर चेकिंग की लगभग कोई व्यवस्था नहीं है, और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से यह अवैध व्यापार बेरोक-टोक जारी है। भूमि कारोबार में लिप्त कुछ व्यापारी शहरी भूमि को ग्रामीण दर्शाकर रजिस्ट्रार कार्यालय में साठगांठ के ज़रिए रजिस्ट्री करा लेते हैं। तहसीलों में इन कागज़ों को सिस्टम के चलते मान्यता दे दी जाती है। ऐसे लोग राजनीतिक संरक्षण का लाभ उठाकर कानून से ऊपर बन बैठे हैं। जनपद मुख्यालयों में बैठे अधिकारी न तो क्षेत्र की ज़मीनी हकीकत से वाकिफ हैं, न ही कार्यालयों से बाहर निकलना पसंद करते हैं। परिणामस्वरूप आम जनता छोटी-छोटी समस्याओं के समाधान के लिए भटकने को मजबूर है। बुंदेलखंड, विशेष रूप से हमीरपुर-महोबा क्षेत्र, विकास के जिस मोड़ पर खड़ा है, वहां से आगे बढ़ने के लिए एक सशक्त और ईमानदार राजनीतिक तथा प्रशासनिक इच्छाशक्ति की आवश्यकता है। वरना यह क्षेत्र यूं ही घोषणाओं, अपराध और उपेक्षा के गर्त में डूबा रहेगा।

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