रियल मीडिया नेटवर्क
भरुआ सुमेरपुर। देशभक्तों की राष्ट्रवादी भूमिका के मद्देनजर वर्णिता संस्था के तत्वावधान में विमर्श विविधा के अन्तर्गत जिनका देश ऋणी है के तहत मातृभूमि के एक युवा आत्महोता बालकृष्ण चाफेकर की पुण्यतिथि पर संस्था के अध्यक्ष डा. भवानीदीन ने श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि बालकृष्ण चाफेकर सही मायने में एक समर्पित युवा बलिदानी थे। उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है। इनका महाराष्ट्र के पुणे के पास चिंचवड़ गांव में हरि विनायक चाफेकर तथा द्वारका चाफेकर के घर 1873 में जन्म हुआ था। ये तीन भाइयों में मंझले थे। प्रारम्भ से ही इन पर देशवादी विचारधारा थी। उस समय पुणे के आसपास प्लेग नामक महामारी फैली हुई थी। ब्रिटिश अधिकारी इस महामारी से जनरक्षा के प्रति बहुत ही उदासीन एवं बेपरवाह थे। फलतः तीनों भाईयों ने डब्ल्यू सी रैन्ड और आयर्स्ट नाम के गोरे अधिकारियों को मौत के घाट उतार दिये। तब ब्रिटिश सरकार ने भाइयों के साथ बालकृष्ण को गिरफ्तार कर लिया। इन्हें 12 मई 1899 को यरवदा जेल में फांसी दे दी गई। 24 वर्ष की उम्र में यह मां भारती के लिए शहीद हो गये। वर्णिता संस्था ने उनको नमन कर श्रृद्धांजलि अर्पित की। इस कार्यक्रम में अशोक अवस्थी, राधारमण गुप्ता, बाबूलाल, महावीर, रिचा, पंकज सिंह, भोलू सिंह, प्रेम, विकास, आशुतोष, प्रिन्स, राजकिशोर, राजन, देवराज, संतोष, अजय, दस्सी आदि शामिल रहे।

