घरों में रखा क्लीनिंग तेजाब बन रहा मौत का सामान

स्पेशल रिपोर्ट

किसी भी वजह से तेजाब पीने की बढ़ रही प्रवृत्ति, तड़प तड़प कर जी रहे इसके शिकार
पीयूष त्रिपाठी
कानपुर। जिंदगी को आसान बनाने वाली रोजमर्रा की घरेलू उपयोग की वस्तुओं के विनाशक प्रयोग के मामले बढ़ते जा रहे है। जरा सी लापरवाही जिंदगी पर भारी पड़ती जा रही है। जागरूकता का अभाव और सावधानी हटी, दुर्घटना घटी की कहावत चरितार्थ हो रही है। जिस वस्तु का उपयोग जीवन में अच्छाई के लिए होता है वही जीवन खत्म करने का सर्वसुलभ साधन बनता जा रहा है। जैसे कि क्लीनिंग के लिए हर बाथरूम के लिए आवश्यक तरल पदार्थ जिसे बोलचाल की भाषा में तेजाब कहते हैं। यही तेजाब अगर एक घूंट भी किसी के गले के नीचे उतर जाएं तो वह जीवन भर के लिए असाध्य बन जाता है और अभिशाप भी हो जाता है। जीएसवीएम मेडिकल कालेज से जुड़े अस्पतालों में इस तेजाब से पीड़ित मरीजों की संख्या काफी बढ़ रही है। मुश्किल बात यह है कि इसका सेवन अगर काफी मात्रा में कोई कर लेता है तो मौत हो जाती है और अगर बहुत कम मात्रा में यह पेट में चला जाता है तो मौत से भी बदतर जिंदगी गुजारनी पड़ रही है।
“तेजाब” का अर्थ एसिड होता है, जो एक प्रकार का रासायनिक पदार्थ होता है। यह खट्टा स्वाद वाला होता है और कुछ धातुओं के साथ प्रतिक्रिया कर सकता है। तेजाब को “अम्ल” भी कहा जाता है।
सल्फ्यूरिक एसिड (Sulphuric Acid):यह एक मजबूत एसिड है जिसका उपयोग बैटरी, उर्वरक और अन्य उद्योगों में किया जाता है।
नाइट्रिक एसिड (Nitric Acid):यह एक मजबूत एसिड है जिसका उपयोग उर्वरक, विस्फोटक और अन्य उद्योगों में किया जाता है।
एसिटिक एसिड (Acetic Acid):औद्योगिक प्रक्रियाएँ:
तेजाब का उपयोग विभिन्न उद्योगों में किया जाता है, जैसे कि रसायन, धातु और प्लास्टिक उद्योग।
फर्नीचर:तेजाब का उपयोग फर्नीचर को साफ करने के लिए किया जा सकता है।
घर की सफाई:तेजाब का उपयोग टॉयलेट क्लीनर और अन्य घरेलू सफाई उत्पादों में किया जा सकता है।
सुरक्षा:तेजाब एक खतरनाक रसायन है और इसे संभालते समय सावधानी बरतनी चाहिए। तेजाब से त्वचा जल सकती है, इसलिए इसे सीधे त्वचा पर न आने दें। यदि आप तेजाब के साथ काम कर रहे हैं, तो दस्ताने और सुरक्षा चश्मे पहनें। यदि आप तेजाब के संपर्क में आते हैं, तो तुरंत पानी से धो लें और डॉक्टर से सलाह लें।
सुरक्षा उपाय: तेजाब को बच्चों और पालतू जानवरों से दूर रखें. तेजाब का उपयोग करते समय हाथ के दस्ताने, आंखों के लिए सुरक्षा चश्मा और मास्क का उपयोग करें. तेजाब को गर्म पानी के साथ मिलाना या हवा में उड़ने से बचना चाहिए. तेजाब के संपर्क में आने पर तुरंत पानी से धो लें और डॉक्टर से संपर्क करें. तेजाब का उपयोग करते समय कमरे को अच्छी तरह से हवादार रखें. तेजाब को खुले में या धूप में न रखें.
अन्य सफाई विकल्प:तेजाब के बजाय, आप अन्य सफाई उत्पादों का भी उपयोग कर सकते हैं, जैसे कि बेकिंग सोडा, सिरका, या प्राकृतिक सफाई एजेंट. तेजाब एक खतरनाक रसायन है और इसका उपयोग करते समय सावधानी बरतनी चाहिए.
दूसरा एक सबसे महत्वपूर्ण लेकिन विचित्र ट्रेंड यह चल रहा है कि लोगों को लैट्रिन के रास्ते अगर खून आने लगता है तो अधिकांश मामलों में डॉक्टर ही पाइल्स का इलाज करने लगते है। बहुत कम ऐसा होता है जब उसकी प्रॉपर जांच कराकर डॉक्टर्स असली रोग पहचान पा रहे हों। नतीजा यह निकल रहा है कि डाक्टर्स की यह लापरवाही मरीजों पर भारी पड़ रही है और लोग आंतों के घाव और यहां तक कि कैंसर की स्टेज तक पहुंच रहे है। जीएसवीएम मेडिकल कालेज के गैस्ट्रो, इंट्रो लाजी विभाग के हेड डा विनय कुमार ने इन दोनों ही समस्याओं पर चिंता व्यक्त करते हुए जागरूकता अभियान चलाए जाने व घरों में क्लीनर्स के दुरूपयोग रोके जाने की जरूरत पर बल दिया। डा विनय ने पेज3न्यूज से एक विशेष साक्षात्कार में कहा कि, जीएसवीएम मेडिकल कालेज की न्यू पीजीआई बन जाने के बाद इसके कामकाज और आधुनिक तरीके से विशेषज्ञ डाक्टर्स की उपलब्धता के कारण लोकप्रियता बढ़ रही है जिससे मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है। बातचीत करते हुए डा विनय ने कहाकि, छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देने की बहुत जरूरत है। आज के पढ़े लिखे समाज को इस बात के लिए सावधान और सजग रहना चाहिए कि घरों में इस्तेमाल होने वाल आवश्यक वस्तुएं दुरूपयोग के काम न आएं। जैसे कि उन्होंने बताया कि घरों में सफाई के लिए इस्तेमाल होने वाले तरल क्लीनिंग आइटम्स में प्रमुख है तेजाब। यह सामान्य रंग का होता है। हर घर में इसे अलग अलग बर्तनों में रख दिया जाता है। सभी को पता है कि यह घातक है। इसे अगर पी लिया जाए तो जान जा सकती है। फिर भी इधर देखने में आ रहा है कि कोई किसी को मारने के उद्देश्य से तो कोई आत्महत्या के उद्देश्य से, जरा सी बातों में खुद को घायल कर लेने के उद्देश्य से और कभी नशे की हालत में तो कभी अन्य किसी पदार्थ के धोखे में इसे पी लेता है। इसकी संख्या बढ़ती जा रही है। बताया कि अगर ज्यादा पी लिया है और समय पर चिकित्सा नहीं मिलती है तो मौत हो जाती है अगर कम पी लिया है तो उसकी जिंदगी मौत से बदतर हो जाती है। गले से लेकर आंतों तक सब क्षतिग्रस्त हो जाता है। आहार नली इस कदर क्षतिग्रस्त होती है कि डॉक्टर चाह कर भी कुछ नहीं कर सकते। और वह व्यक्ति बहुत ही दर्दनाक हालत में तड़पता रहता है। डाक्टर विनय ने कहाकि, अब वक्त है कि ऐसे तेजाब या अन्य कीटाणु नाशक पदार्थ को लेकर हर घर को जागरूक करना बहुत आवश्यक है। कई बच्चे इसे धोखे में पी लेते हैं। जिन्हें ठीक कर पाना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने अपील की है कि तेजाब से दुखदायक होने वाली जिंदगी को बचाने के लिए हर एक को जागरूक होना पडे़गा। क्योंकि चारो तरफ से तेजाब जनित मौतों व तकलीफों के केस बढ़ते जा रहे है। डॉ विनय ने एक और बात पर बल दिया और मरीजों से ज्यादा डाक्टर्स से अपील की है कि अगर किसी व्यक्ति को लैट्रिन के रास्ते से ब्लड आ रहा है तो सिर्फ अंदाजा लगाकर पाइल्स का इलाज करना बंद कर दें वर्ना मरीजों की जान पर बन आ रही है। इसलिए ब्लड आने के कारणों का सटीक पता लगाने के बाद ही इलाज करें। अन्यथा इस तरह के मरीजों की संख्या में भारी इजाफा देखने को मिल रहा है। उन्होंने बताया कि जीएसवीएम मेडिकल कालेज की पीजीआई में लगभग 18 जिलों से मरीज आते हैं। यहां मिलने वाली इंडोस्कोपी आदि की सुविधा इतनी बढ़िया है कि अब लखनऊ की दौड़ लगाने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि गर्मी के मौसम में पेट का इंफेक्शन होता है, डायरिया आदि का प्रकोप बढ़ रहा है ऐसे में लोगों को खानपान में सावधानी बरतना आवश्यक है।

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