विशेष संवाददाता
राठ(हमीरपुर)—-चिल्ली गांव में 22/23 मई की रात हुए दिल दहला देने वाले हत्याकांड को दो दिन बीत चुके हैं, लेकिन पुलिस अभी तक किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच पाई है। घटना के बाद फॉरेंसिक टीम और डॉग स्क्वाड की मदद भी ली गई, बावजूद इसके अपराधी का अब तक कोई सुराग नहीं मिल सका है। जांच की धीमी रफ्तार से मृतका के परिजनों और ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है।
घटना में 26 वर्षीय गीता देवी की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी, जबकि उनका पति गंभीर रूप से घायल अवस्था में मिला। उनका इलाज फिलहाल कानपुर के रीजेंसी अस्पताल में जारी है। घटना के वक्त दंपति की तीन वर्षीय मासूम बेटी शान्वी भी मौके पर मौजूद थी, जो सदमे में है और अब तक कुछ भी स्पष्ट बोल पाने में असमर्थ है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मासूम बच्ची बार-बार बुदबुदा रही थी, “मम्मी को मत मारो… मम्मी को मत मारो।”
ग्रामीणों का कहना है कि चिल्ली गांव में आए दिन छोटी-बड़ी चोरियां होती रहती हैं, लेकिन पुलिस की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती। लोगों ने आरोप लगाया कि पुलिस केवल औपचारिकता निभाकर चली जाती है और अपराधियों पर नकेल कसने में विफल रही है। यदि समय रहते पुलिस ने सख्ती दिखाई होती, तो इस तरह की जघन्य वारदात नहीं होती।
घटना के अगले दिन पुलिस अधीक्षक के सामने ग्रामीणों ने एकजुट होकर अपने गुस्से का इज़हार किया। वहीं, जब पुलिस महानिरीक्षक घटनास्थल पर पहुंचे, तो अधिकतर परिजन गीता देवी के पोस्टमार्टम के लिए राठ के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मौजूद थे। इसी वजह से उनका सीधे जनआक्रोश से सामना नहीं हो सका। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में जुआ और शराब इस समय बहुतायत में है, समझ में नहीं आ रहा है कि पुलिस प्रशासन इस ओर से बिल्कुल ही बेपरवाह क्यों बना हुआ है?
ग्रामीणों की मांग है कि दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर कड़ी सजा दी जाए और गांव में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए। पुलिस प्रशासन पर अब दबाव है कि वह जल्द से जल्द इस मामले में ठोस कार्रवाई करे और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाए।
