रियल मीडिया नेटवर्क
भरुआ सुमेरपुर। देशपरायणों की देश के प्रति दीवानगी के मद्देनजर वर्णिता संस्था के तत्वावधान में विमर्श विविधा के अन्तर्गत जिनका देश ऋणी है के तहत बिजौलिया किसान आन्दोलन के सूत्रधार विजय पथिक की पुण्यतिथि एवं मातृभूमि के एक महान सूरमा विनायक दामोदर सावरकर की जयंती पर संस्था के अध्यक्ष डा. भवानीदीन ने श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि विजय सिंह पथिक का मूल नाम भूपसिंह गुर्जर था। इनका जन्म 28 फरवरी 1882 को हमीर सिंह और कमला कुंवारी के घर बुलन्दशहर के गुठावली कला गांव में हुआ था। ये प्रारम्भ से ही देशपरायण थे। रासबिहारी बोस से परिचय के बाद ये क्रांतिकारी हो गये थे। 1915 में इन्होंने अपना नाम विजय सिंह पथिक रख लिया। ये किसान आन्दोलनों तथा भील आन्दोलनों के नायक बन गये थे। इन्हें गिरफ्तार कर पांच वर्ष की सजा दी गयी। कोई वकील न मिलने पर स्वयं पैरवी की। पथिक जी ने सामाजिक कार्यों के क्षेत्र में भी अग्रणी भूमिका निभाई। कालांतर में आजाद भारत में 28 मई 1954 को इनका निधन हो गया।
इसी तरह दामोदर वीर सावरकर की जयंती पर संस्था अध्यक्ष ने आजादी के लिए उनके योगदान को याद करते हुये कहा कि सावरकर ने अपने करीब साढ़े आठ दशकों के जीवन में सदैव राष्ट्र के लिए काम किया। वे आजादी के सूरमा के साथ साथ एक अच्छे वक्ता, लेखक और कलाकार भी थे। सावरकर ने आजादी के लिए विदेशों में भी काम किया। कालांतर में 26 फरवरी 1966 को सावरकर का निधन हो गया। इस कार्यक्रम के दौरान बाबूलाल, महावीर, संतोष, विकास, रामनरायन, प्रेम, सागर, अजय, दस्सी आदि उपस्थित रहे।

