रियल मीडिया नेटवर्क
भरुआ सुमेरपुर। क्रांतिकारियों की आजादी के संघर्ष में भूमिका के मद्देनजर वर्णिता संस्था के तत्वावधान में विमर्श विविधा के अन्तर्गत जिनका देश ऋणी है के तहत एक बेमिसाल सूरता और संगठन क्षमता के साक्षी शचींद्रनाथ सान्याल की जयंती पर संस्था के अध्यक्ष डा. भवानीदीन ने श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि शचींद्रनाथ सान्याल एक बेजोड़ क्रांतिधर्मी थे। उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है। इनका जन्म 3 जून 1893 को हरिनाथ सान्याल और वासिनी देवी के घर बनारस में हुआ था। ये प्रारम्भ से ही देशपरायण थे। 15 वर्ष की उम्र में क्रांति से सम्बंधित अनुशीलन समिति का गठन किया। 1923 में हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन की स्थापना की। ये अंग्रेजों के घोर विरोधी होने पर पुलिस की नजरों में चढ़े हुए थे। बनारस षडयंत्र और लाहौर षडयंत्र केस में इनको गिरफ्तार कर लिया गया। सत्तावनी समर के बाद 1915 के दूसरे सशस्त्र विद्रोह की योजना के यही सूत्रधार थे। इनको दो बार काले पानी की सजा हुई। 1937 में प्रान्त में कांग्रेस की सरकार बनने पर इनको जेल से रिहा कर दिया गया। बाद में क्षयरोग से पीड़ित होकर 1942 में इन्होंने दुनिया से विदा ले ली। इस कार्यक्रम में अशोक अवस्थी, राधारमण गुप्ता, बाबूलाल, सिद्धा, संतोष, प्रेम, प्रिन्स, महावीर, रामनरायन, मनबोधन, विकास, रिचा, पंकज सिंह, भोलू सिंह, अजय, दस्सी आदि शामिल रहे।

