रियलमीडिया नेटवर्क
राठ /हमीरपुर)——जिला प्रशासन की लापरवाही और अव्यवस्था का आलम ऐसा है कि अब अंतिम संस्कार के लिए भी सम्मानपूर्वक स्थान नहीं बचा। जलालपुर थाना क्षेत्र के ग्राम बीलपुर (ममना) निवासी भाजपा सरीला मंडल के महामंत्री शिवेंद्र द्विवेदी का अंतिम संस्कार गांव के मोक्षधाम में नहीं हो सका, क्योंकि शमशान भूमि पर अवैध कब्जा होने के कारण कब्जाधारकों ने शवदाह की अनुमति देने से इनकार कर दिया।
निरीह परिजझनों को अंततः विवश होकर शिवेंद्र द्विवेदी का अंतिम संस्कार सड़क किनारे करना पड़ा। इस अपमानजनक स्थिति ने न केवल ग्रामीणों को आक्रोशित किया, बल्कि प्रशासनिक ढांचे की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
शिवेंद्र द्विवेदी ने कुछ दिन पूर्व अपने घर के सामने लगे सबमर्सिबल पंप को अराजक तत्वों द्वारा उखाड़े जाने और टंकी तोड़ दिए जाने की शिकायत थाना जलालपुर में की थी। परंतु बताया जाता है कि पुलिस द्वारा कार्रवाई करने के बजाय उन्हें डांट-फटकार कर वापस भेज दिया गया। इससे आहत होकर उन्होंने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
शिवेंद्र द्विवेदी एक सामान्य परिवार से थे। उनके दो भाई गुजरात में मजदूरी कर परिवार चलाते हैं, जबकि वह गांव में रहकर अपने परिजनों का भरण-पोषण करते थे। भाजपा की स्थानीय गतिविधियों में सक्रिय रहते हुए वह सरीला मंडल के महामंत्री पद पर कार्यरत थे।
जब अंतिम संस्कार के लिए गांव के मोक्षधाम ले जाया गया, तो वहां मौजूद अवैध कब्जाधारकों ने साफ इंकार कर दिया। स्थानीय लोग बताते हैं कि शमशान घाट की भूमि पर लंबे समय से दबंगों का कब्जा है, और प्रशासन अब तक आंखें मूंदे बैठा है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह घटना किसी एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की पीड़ा है। यदि अंतिम संस्कार जैसी मानवीय प्रक्रिया के लिए भी जमीन सुरक्षित नहीं है, तो यह गंभीर चिंता का विषय है।
शिवेंद्र के निधन के बाद कई राजनीतिक नेता उनके घर पहुंचे और शोक व्यक्त कर परिजनों को हरसंभव मदद का आश्वासन दिया। परंतु सवाल यह उठता है कि क्या यह घटनाक्रम केवल शोक व्यक्त करने और आश्वासन देने तक सीमित रहेगा? शमशान भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कब कराया जाएगा?
यह घटना न केवल प्रशासनिक विफलता को उजागर करती है, बल्कि सामाजिक चेतना और संवेदनशीलता की भी परीक्षा है। अब समय है कि शासन-प्रशासन अवैध कब्जों के खिलाफ कठोर कदम उठाए और ऐसे पवित्र स्थलों को सुरक्षित करे।
