स्वामी अलखानंद अक्रिय महाराज जी की पुण्यतिथि श्रद्धा, भक्ति और भावनाओं के संग संपन्न

श्रीपरमअक्रियधाम परिसर में आध्यात्मिक वातावरण, हजारों श्रद्धालुओं ने की सहभागिता

पीलीभीत।श्रीपरमअक्रियधाम परिसर में सोमवार को ब्रह्मलीन महामंडलेश्वर अनंत श्री विभूषित श्री श्री 1008 स्वामी अलखानंद अक्रिय महाराज जी की पुण्यतिथि भक्ति, श्रद्धा और भावनाओं के साथ संपन्न हुई। इस पावन अवसर पर जिले भर ही नहीं, बल्कि अन्य जनपदों और राज्यों से भी हजारों श्रद्धालु, साधु-संत, अखाड़ा प्रतिनिधि एवं अनुयायी श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुंचे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता क्षेत्रीय विधायक एवं स्वामी जी के परम भक्त महामंडलेश्वर स्वामी प्रवक्तानंद महाराज ने की। उन्होंने अपने पूज्य गुरुदेव की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए सभा को संबोधित किया और स्वामी जी के व्यक्तित्व व कृतित्व को स्मरण करते हुए उन्हें सनातन धर्म का स्तंभ बताया। उन्होंने कहा कि “ब्रह्मश्रोत्रीय ब्रह्मनिष्ठ अवधूत शिरोमणि पूज्य स्वामी अलखनंद अक्रिय महाराज एक महान योगी, त्याग, तपस्या और शांति के प्रतीक थे। उनका जीवनदर्शन आज भी करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।”
सभा में उन्होंने यह भी अवगत कराया कि पूज्य गुरुदेव 23 जून 2003 को ब्रह्मलीन हुए थे और आज उनके दिव्य प्रस्थान को 23 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं।
पूरे परिसर में आध्यात्मिक वातावरण व्याप्त रहा। श्रद्धालुओं ने गुरुदेव की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इसके उपरांत भावपूर्ण भजन, सत्संग, गुरुचरण वंदना जैसे आयोजन हुए, जिनमें भाग लेकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। संत समाज ने सत्संग में स्वामी जी को “एक युगपुरुष” की संज्ञा देते हुए उनके सिद्धांतों को जन-जन तक पहुंचाने की बात कही।
कार्यक्रम का समापन विशाल भंडारे के साथ हुआ, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। भंडारे के दौरान स्वामी जी के जयघोषों से वातावरण गूंज उठा और श्रद्धा-भक्ति की लहर देर रात तक जारी रही।
इस अवसर पर जनपद के कई गणमान्य नागरिक, जनप्रतिनिधि, विभिन्न धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी तथा श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम की सफलता में श्रीपरमअक्रियधाम समिति, स्थानीय भक्त मंडल तथा संत समाज की अहम भूमिका रही।

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