अधिकारियों ने किसानों को गन्ने की उत्पादकता बढ़ाने को किया जागरूक


ग्राम गढ़वा खेड़ा, सिंहपुर और दुर्जनपुर कलां में कृषकों से की मुलाकात
मुकेश कुमार की रिपोर्ट

पीलीभीत। यूं तो पूरे यूपी में गन्ने की खेती लगभग हर इलाके में होती है लेकिन तराई के आधा दर्जन जिलों में विशेष तौर पर की जाती है। चीनी मिलों की आपूर्ति में तराई के इलाकों का बड़ा योगदान रहता है। इसीलिए सरकार यहां के किसानों को गन्ना के संबंध में वैज्ञानिक विधि बताने, समझाने और अमल कराने के लिए अधिकारियों को प्रेरित करती है। इसी क्रम में
गन्ना किसानों को फसल की उत्पादकता बढ़ाने के लिए समयबद्ध कृषि कार्यों को अपनाना चाहिए। यह अपील जिला गन्ना अधिकारी खुशी राम भार्गव ने ग्राम गढ़वा खेड़ा, सिंहपुर और दुर्जनपुर कलां में भ्रमण के दौरान की। भ्रमण के दौरान उन्होंने कृषकों के खेतों का निरीक्षण करते हुए गन्ने की खेती से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। गन्ना अधिकारी ने किसान मनप्रीत सिंह, गुरिंदर सिंह, कमल मिश्रा, आशीष और संदीप के खेतों का दौरा कर गन्ने की स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने उपस्थित सभी कृषकों को जून माह में किए जाने वाले प्रमुख कृषि कार्यों की जानकारी देते हुए बताया कि इन उपायों को समय पर अपनाकर फसल को रोगों व कीटों से बचाया जा सकता है, साथ ही उपज में भी उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। गन्ने के खेतों में अनावश्यक खरपतवारों की वृद्धि को नियंत्रित करना आवश्यक है। आवश्यकता पड़ने पर अनुशंसित खरपतवारनाशी 2,4-D का प्रयोग किया जा सकता है। मानसून की अनिश्चितता को देखते हुए खेतों में आवश्यकतानुसार सिंचाई करें। साथ ही यह सुनिश्चित करें कि खेत में जलभराव न हो, इसके लिए उचित जल निकासी की व्यवस्था करें। गन्ने के पौधों की मजबूती और गिरने से बचाव हेतु पौधों के पास मिट्टी चढ़ाएं। हल्की गुड़ाई से मिट्टी में हवा का संचार बढ़ेगा, जिससे जड़ों को बल मिलेगा। जून माह में गन्ने को नाइट्रोजन की दूसरी खुराक देना लाभकारी होता है। यूरिया का प्रयोग कृषि वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार ही करें। टॉप बोरर और अर्ली शूट बोरर जैसे कीटों की निगरानी करें तथा आवश्यकता अनुसार क्लोरेपायरीफॉस जैसे कीटनाशकों का छिड़काव करें। रेड रॉट जैसी बीमारियों के लक्षण दिखाई देने पर प्रभावित पौधों को खेत से हटा दें। यदि गन्ने के साथ मूंग या उड़द जैसी कोई अंतरवर्ती फसल बोई गई है, तो जून माह में उसे हटा देना चाहिए, जिससे गन्ने की फसल को पूरा पोषण मिल सके। जिला गन्ना अधिकारी ने कृषकों से अपील की कि वे इन कृषि उपायों को समय से अपनाकर अपनी फसल की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में सुधार लाएं। किसी भी प्रकार की सहायता या जानकारी के लिए कृषक अपने नजदीकी गन्ना विकास परिषद, गन्ना समिति या संबंधित चीनी मिल के अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं। इस अवसर पर संजय श्रीवास्तव (ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक, पूरनपुर), भारत प्रसाद (गन्ना विकास निरीक्षक, पूरनपुर), पुष्पेंद्र सिंह (उपगन्ना प्रबंधक, एलएच चीनी मिल), शौलेन्द्र पटेल, धर्मेंद्र शाहू (गन्ना पर्यवेक्षक) समेत अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

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