भरुआ सुमेरपुर। मौसम साफ होते ही किसान खरीफ की फसलें बोने में जुट गया है। तिल, उरद, मूंग, अरहर, ज्वार, मूंगफली की बुवाई तेजी के साथ शुरू है लेकिन किसानों को राजकीय बीज भंडार से बीज नहीं मिल पा रहा है। इससे किसान खुले बाजार से घटिया किस्म के बीज महंगे दामों पर खरीदने को मजबूर हो रहे हैं।
एक पुरानी कहावत है कि तेरह कार्तिक तीन आषाढ़ मतलब रबी की फसल कार्तिक मास के तेरह दिनों में बो जानी चाहिए। इसी तरह खरीफ की फसलें बोने के लिए महज तीन दिन का ही अवसर हाथ आता है अवसर मिलते ही किसान आंख मूंदकर खरीफ की फसलें बोने में जुट गया है। किसान प्रदीप कुमार, सुरेश कुमार, उदयभान यादव, चंद्रपाल, इंद्रपाल यादव, नवीन यादव ने कहा कि आषाढ़ मास में खरीफ की फसलें बोना बेहद मुफीद होता है मौका पाते ही किसान तिल, उरद, ज्वार, अरहर, मूंग की फसलें बोने में जुट गया है। किसानों के अंदर दर्द है कि उन्हें राजकीय बीज भंडार से प्रमाणित बीज नहीं मिल पा रहा है क्योंकि बीज भंडार में तकनीकी खामी के कारण मशीन नहीं चल रही है। राजकीय बीज भंडार प्रभारी विक्रम सिंह ने बताया की मशीन खराब होने की उच्च अधिकारियों को पत्राचार किया गया है जल्दी मशीन ठीक करा ली जाएगी।
