जगदीश श्रीवास्तव
राठ हमीरपुर)जनपद में पिछले कुछ दिनों से मूसलाधार बारिश और जलभराव से लोग बेहाल हैं। कई गांवों में घरों तक में पानी भर गया, लेकिन सरकारी फाइलों में इन हालातों के बीच भी मनरेगा मजदूर दिन-रात मिट्टी खुदाई और मेड़बंधी करते रहे!
ताजा मामला मुस्करा विकासखंड का है, जहां मनरेगा माफियाओं पर 13,502 मजदूरों की फर्जी ऑनलाइन डिमांड दिखाकर करोड़ों रुपये के घोटाले का आरोप लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के चलते कहीं भी खुदाई या निर्माण कार्य संभव ही नहीं था, बावजूद इसके जिम्मेदारों ने कागजों में नाले खुदवा दिए और खेतों की मेड़ बंधवा दी।
ग्राम पंचायत गहरौली में नाला खुदाई के नाम पर 605 मजदूर और उमरी पंचायत में 678 मजदूरों को काम करता दिखाया गया। ब्लॉक स्तर पर यह आंकड़ा 3,354 मजदूरों तक पहुंच गया। ग्रामीणों का आरोप है कि एक ही मजदूरी की फोटो को एडिट कर अलग-अलग मस्टर रोल में चिपका दिया गया ताकि ज्यादा भुगतान निकाला जा सके।
ग्रामीणों का आरोप है कि इस फर्जीवाड़े में ब्लॉक स्तर से लेकर जिला कार्यालय तक के अफसर शामिल हैं। पहले भी जिलाधिकारी ने मनरेगा में गड़बड़ी की पुष्टि कर मुकदमा दर्ज कराने का निर्देश दिया था, लेकिन उच्च अधिकारियों की मिलीभगत से कार्रवाई ठंडे बस्ते में डाल दी गई।
नमुख्य विकास अधिकारी चंद्रशेखर शुक्ला और डीसी मनरेगा ने तीन दिन पहले जांच के आदेश दिए थे, लेकिन अब तक किसी पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे साफ है कि भ्रष्टाचारियों को ऊपर तक से संरक्षण मिल रहा है।
गांव के लोगों ने सीडीओ, डीसी मनरेगा, बीडीओ, ग्राम सचिव, लेखाकार और ग्राम प्रधान तक की मिलीभगत पर सवाल उठाते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई न हुई तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

